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हादसे में छात्र की मौत

Sat, 19 Sep 2015 11:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, चित्रकूट।
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सीतापुर चौकी अंतर्गत खोही गांव में शनिवार सुबह दुकान से पेन लेकर स्कूल लौट रहे छात्र को ट्रैक्टर ने कुचल दिया। जबकि उसका साथी घायल हो गया। घटना से गुस्साए परिजनों और स्कूली बच्चों ने खोही पालदेव मार्ग पर जाम लगा दिया। उन्हाेंने मार्ग पर स्पीड ब्रेकर बनवाने की मांग की। आक्रोशित ग्रामीणों ने ट्रैक्टर फूंकने का भी प्रयास किया। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने उन्हें कार्रवाई का आश्वासन दिया, इसके बाद लोग शांत हुए।
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खोही गांव के पास स्थित पीएम मेमोरियल इंटर कालेज में कक्षा तीन का छात्र रंजीत साहू (8) पुत्र भगवानदीन निवासी सेमरिया जगन्नाथवासी सहपाठी अजय पुत्र मुन्ना के साथ स्कूल से छुट्टी लेकर दुकान से पेन लेने गया था। वहां से लौटते समय खोही तिराहे के पास छात्रों की साइकिल बगल से गुजर रहे ट्रैक्टर ट्राली के हुक में फंस गई। हादसे में साइकिल चला रहा अजय दूर जा गिरा। जबकि रंजीत ट्रैक्टर के नीचे आ गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। हादसे को देख लोग दौड़े लेकिन तब तक चालक टपोरिहा (20) पुत्र मुन्ना सिंह निवासी कसहाई वाहन छोड़कर भाग निकला। घटना से गुस्साए लोगों ने मृतक के परिजनों के साथ खोही पालदेव मार्ग पर जाम लगा दिया।

वहीं छात्र के मौत की खबर मिलते ही बच्चे खोही बाईपास मार्ग पर धरना देने बैठ गए। उन्हाेंने एआरटीओ को बुलाने और मार्ग पर स्पीड ब्रेकर बनवाने की मांग की। सीतापुर चौकी प्रभारी नीरज यादव, एसडीएम रजनीश कुमार मिश्रा और सीओ सिटी राजेश कुमार तिवारी ने बच्चों और ग्रामीणों को समझाया। एआरटीओ केडी सिंह गौर भी मौके पर पहुंचे। कार्रवाई और मुआवजे के आश्वासन के बाद ग्रामीण शांत हुए। इस दौरान करीब तीन घंटे तक आवागमन बाधित रहा।
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50 हजार की सहायता दी जाएगी
एआरटीओ केडी सिंह गौर ने बताया कि औपचारिकता पूरी करने के बाद परिजनों को पचास हजार की सहायता परिवहन विभाग द्वारा दी जाएगी। पुलिस विभाग की कार्रवाई के बाद मुआवजा भी मिलेगा।

 परिजन बदहवास
पुत्र की मौत से भगवानदीन बदहवास था। उसके दो पुत्रों में रंजीत छोटा था। बड़ा धर्मेंद्र कक्षा 11 का छात्र है। इसके अलावा उसके दो पुत्रियां हैं। उधर मां अनीता भी बार-बार बेहोश हो रही थी।

आएदिन होते हैं हादसे
ग्रामीणों ने कहा कि यहां कई स्कूल हैं। इसके बाद भी स्पीड ब्रेकर या सांकेतिक चिह्न न होने से अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं। विभागीय जिम्मेदार सिर्फ आश्वासन देते हैं।
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