रेलवे स्टेशन पर कोई यात्री बीमार पड़ जाए तो भगवान ही मालिक है। यहां बेहतर इलाज तो दूर फर्स्ट एड तक नहीं मिलता। कुछ ऐसा ही वाकया गुरुवार को दिखा।
हुआ यूं कि ट्रेन में यात्रा कर रहे एक बच्चे की तबियत खराब हो गई। परिजन इलाज के लिए बीस मिनट तक इधर-उधर भटकते रहे। अफसरों से गुहार लगाई, पर बच्चे के इलाज की व्यवस्था नहीं हो सकी। ट्रेन चल पड़ी तो ये लोग बच्चे को लेकर चले गए। एसएस ने बताया कि बच्चों को इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने को अगले स्टेशन पर सूचना भेज दी गई है।
राजेंद्रनगर पटना से टुंडला टर्मिनस जाने वाली 13201 अप जनता एक्सप्रेस गुरुवार को लगभग साढ़े दस बजे मानिकपुर स्टेशन पहुंची। ट्रेन में सवार छोटेलाल चौधरी परिवार समेत आरा (बिहार) से कल्याण (महाराष्ट्र) जा रहे थे। पत्नी मंदोदरा के अलावा शैलेंद्र, पूजा, मीनू, शोभा थीं। साथ ही शैलेंद्र का साल भर का पुत्र सुशांत भी था।
सुशांत की तबीयत खराब हो गई तो पूरा परिवार मानिकपुर रेलवे स्टेशन पर उतर गया। ये लोग चिकित्सक बुलाने के लिए स्टेशन अधीक्षक के कमरे से जीआरपी तक बदहवास घूमते रहे, पर किसी ने नहीं सुनी। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि महिलाओं ने रो दिया, पर कोई नहीं पसीजा। लगभग बीस मिनट पर ट्रेन ने सीटी दे दी तो ये लोग रोते बिलखते ट्रेन में चढ़कर चले गए।
चार नंबर प्लेटफार्म के पास पटेलनगर रेलवे कालोनी में ही रेलवे का अस्पताल है। यहां चिकित्सक केके यादव, चीफ फार्मासिस्ट केके गुप्ता और दो अन्य कर्मचारी हैं। डा. यादव ने बताया कि वैसे तो हम लोगों को मेमो से ही जानकारी मिलती है पर इमरजेंसी में अगर कोई फोन कर दे तो पांच मिनट में अस्पताल पहुंच जाते है। बताया कि आज मेरे पास कोई सूचना नहीं आई।