ठंड के साथ कोहरे की मार ने ट्रेनों की रफ्तार को धीमा कर दिया है। जंक्शन व मुख्यालय से गुजरने वाली एक दर्जन सुपरफास्ट व एक्सप्रेस ट्रेनें छह घंटों विलंब से गुजरीं। वहीं बुधवार की रात से लेकर गुुरुवार की दोपहर तक सड़क मेें वाहन चलाना मुश्किल हो गया। सर्द हवाएं चलने से लोग स्वेटर पहनने को मजबूर हो गये।
उधर, कोहरा पड़ने से किसान अपनी फसलों को लेकर चिंतित होने लगे हैं। हालांकि कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है।
दिसंबर माह की शुरूआत होते ही ठंड भी शुरू हो गई है।
खेत, खलिहान सहित सड़कों में कोहरे की चादर दिखी। सुबह से ठंडी हवाएं चलने लगी है। इससे लोग स्वेटर व गर्म कपडे़ पहने को मजबूर हो गये हैं। रात के समय सड़कों में कोहरा अधिक होने से वाहन धीमी गति से चल रहे हैं। वहीं कोहरे ने ट्रेनों की रफ्तार पर अंकुश लगा दिया है।
गुरुवार को जंक्शन व मुख्यालय से गुजरने वाली एक दर्जन सुपरफास्ट व एक्सप्रेस ट्रेनें छह घंटे विलंब से गुजरीं। मुख्यालय में दिल्ली से आने वाली संपर्क क्रांति एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय सुबह साढ़े सात बजे की जगह डेढ़ बजे दोपहर में आई। इलाहाबाद से झांसी जाने वाली पैसेंजर ट्रेन पांच घंटे बिलंब से गुजरी।
इसी प्रकार मुंबई हावड़ा, सारनाथ एक्सप्रेस भी चार से पांच घंटे देरी से चल रहीं हैं।
फसल पर भी कोहरे का असर पड़ रहा है। इससे मूंग, ज्वार, बाजरा को नुुकसान है। किसान सोमनाथ का कहना है कि अरहर में लाही फूलने लगी है। कोहरा अधिक पड़ने पर फूल झड़ने लगते है। इससे उत्पादन पर असर पड़ता है।
मसूर भी फूलने लगी है। गेहूं के अलावा अन्य फसलोें में कोहरा नुकसान पहुंच सकता है लेकिन अभी इसकी संभावना नहीं है। गनींवा कृषि फार्म के कृषि वैज्ञानिक विनय कुमार ने बताया कि इस कोहरे से फसल को कोई नुकसान नहीं है।