समाजवादी पार्टी का राजनीतिक दांव काफी हद तक सफल रहा। समर्थित प्रत्याशियों की आधिकारिक घोषणा न करने के बाद भी हिडेन पालिसी अपनाई गई।
यह पालिसी कारगर रही और तीन सीट पर कब्जा हो गया। भाजपा सांसद भैरो प्रसाद मिश्र की पुत्रवधू ने जहां एक सीट जीतकर पार्टी की लाज रख ली वहीं बसपा समर्थित सविता देवी ने भी अपनी पार्टी का खाता खोल दिया।
समाजवादी पार्टी ने आधिकारिक रूप से समर्थित प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की थी, वहीं भाजपा, कांग्रेस और बसपा ने प्रत्याशियों को बाकायदा घोषित समर्थन दिया था।
सपा के जिलाध्यक्ष भइयालाल यादव के पुत्र पंकज यादव ने वार्ड नंबर एक बरगढ़ से जीत हासिल की तो वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष शिवशंकर यादव रसिन से और उनकी पत्नी मैना देवी परसौंजा से चुनाव जीत गईं।
उधर, भाजपा ने सभी 18 वार्डों में अपने समर्थित प्रत्याशी खड़े किए थे। कसहाई से चुनाव मैदान में उतरीं सांसद भैरो प्रसाद मिश्र की पुत्रवधू एकता मिश्रा चुनाव जीत गई हैं।
इसी तरह बसपा समर्थित सविता देवी ने रैपुरा से जीत हासिल की । कांग्रेस का खाता नहीं खुला। कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामभवन गुप्ता प्रदेश सरकार को दोषी ठहराते हैं।
उनका कहना है कि वार्ड तीन में उनकी पार्टी समर्थित प्रत्याशी उमा चौधरी, भदेहदू से छेदीलाल गोस्वामी, सरधुवा से छेदीलाल वर्मा लगातार फाइट में थे। उमा तो चार वोटों से हारीं।
इसके पीछे सुनियोजित साजिश थी। उन्होंने तो आरोप लगाया कि सपा जिलाध्यक्ष भइयालाल यादव के पुत्र पंकज को जिताने में पूरा जोर लगा दिया गया।