पुलिस अधीक्षक पवन कुमार ने बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस कर साढ़े छह लाख के इनामी दस्यु बलखड़िया उर्फ बालखड़े उर्फ सुदेश पटेल के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने की पुष्टि कर दी। इससे उसकी मौत को लेकर लगाई जा रही अटकलों पर विराम लग गया। एसपी ने सुबूत के तौर पर चिता पर रखे बलखड़िया के शव की फोटो दिखाई। उन्होंने बताया कि ये फोटो मुखबिर की सहायता से उपलब्ध हुए हैं। इन्हीं फोटो का जिक्र पूछताछ में बलखड़िया के भतीजे पुष्पेंद्र पटेल ने किया था।
एसपी पवन कुमार ने बताया कि गत दो जुलाई को थाना मारकुंडी के बंधा के पास कोलान ग्राम किहुनिया के जंगल में हुई मुठभेड़ में बलखड़िया का अंत हो गया। इस दौरान हुई फायरिंग में आरक्षी कैलाश सिंह यादव और पुष्पेंद्र कुमार थाना मारकुंडी के अलावा एक अन्य सुंदर यादव को गोली लगी थी। सूचना मिलने पर वह सीओ श्रीपाल यादव, एंटी डकैती टीम और अन्य पुलिस बल मौके पर पहुंचा।
मुठभेड़ के दौरान गैंग के एक सदस्य को गोली लगने की बात सामने आई थी पर इसकी पुष्टि नहीं हो सकी। यह आशंका व्यक्त की जा रही थी कि इसमें गैंग लीडर बलखड़िया पुत्र रामरतन निवासी बरुई थाना बहिलपुरवा ही घायल हुआ है। इसके बाद से ही पुलिस की टीमें जंगल में सघन कांबिंग कर रहीं थीं। एसपी ने बताया कि सर्विलांस और मुखबिरों के माध्यम से इस बात की पुष्टि हुई कि घायल डकैत बलखड़िया ही था। एक मुखबिर ने दस्यु के मारे जाने के बाद उसे जलाने के फोटो वाली चिप भी उपलब्ध कराई है।
हालांकि अभी उस डकैत को गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। एसपी ने बताया कि घायल बलखड़िया को गैंग के लोग इलाज के लिए ले जा रहे थे लेकिन पुलिस की सघन घेरेबंदी की वजह से उसे समय पर इलाज उपलब्ध नहीं हो सका और लगभग दो घंटे तड़पने के बाद उसने दम तोड़ दिया। बाद में गिरोह ने उसे जंगल में ही जला दिया और सुबूत के रूप में फोटो खींचे। इन्हें ही गिरोह में शामिल बलखड़िया के भतीजे खच्चू ने पुष्पेंद्र को दिखाया था। जिसे पूछताछ में पुष्पेंद्र ने भी माना था। जहां मुठभेड़ हुई थी, वहां पुलिस की सर्चिंग जारी है। ताकि उसे जलाने के अवशेष मिल सकें।