मुख्यालय के कलेेक्ट्रेट मार्ग व राजापुर के बेराउर में पूजन करती महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
जिले में हलछठ का पर्व परंपरागत तरीके से मनाया गया। पुत्र के दीर्घायु के लिए महिलाओं ने हलछठ माता की पूजा की। बुंदेलखंड में मनाएं जाने वाले हलछठ पर्व की तैयारी के लिए महिलाओं ने एक दिन पहले से ही तैयारी करना शुरू कर दिया था।
बाजार से कोढुवा खरीदने के साथ पूजा में लगने वाले विभिन्न अनाज, खिलौने व फलों की खरीददारी की। प्रात: काल अनाज को भुंजवाया गया। दोपहर को खरीदे गये मिट्टी के कोढुवा में कई तरह के अनाज को भरा गया। इसके बाद विधि विधान से पूजा की गई।
वृद्ध महिलाओें ने हलछठ माता के त्योहार मनाएं जाने के बारे में कहानियां सुनायी। पूजा समाप्त होने पर माताओं ने अपने पुत्रों के माथे पर पूजा में चढाया जाने वाला जल लगाया।
भौरी गांव की प्रधान आरती मिश्रा व पति मनीष मिश्रा ने गांव की गरीब महिलाओं को हलछठ पर्व मनाने के लिए अनाज व साड़ियां वितरित की। सूखे को देखते हुए सौ परिवारों को चना से लेकर अन्य अनाज उपलब्ध कराए।
इस पर्व पर फसही के चावल व महुंअे की विशेष मांग रही। मान्यता है कि हलछठ के त्योहार के दिन जोता बोया अनाज महिलाएं नहीं खाती है। इस दिन फसही के चावल व महुंआ खाया जाता है।