लालापुर के पास ऊफनाई वाल्मिकी नदी।
- फोटो : अमर उजाला
बारिश व बाढ़ से जिले में कच्चे मकानों का गिरना जारी है। अभी तक दो हजार से अधिक मकान गिरे हैं। जिससे गरीबों का आशियाना छिन गया और उनकी गृहस्थी बर्बाद हो गयी है। पीड़ित राहत पाने को अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। वैसे जिला प्रशासन लगातार बाढ़ प्रभावितों की सूची बनाकर मदद दे रहा है।
लगातार हो रही बारिश से कई कच्चे मकान गिर गए हैं। जिससे दो ग्रामीणों की मौत भी हो चुकी हैं, और सैकड़ों लोग चुटहिल भी हुए हैं। जिलाधिकारी मोनिका रानी के निर्देश पर अधिकारी ऐसे घरों को चिंहित कर परिवार के मुखिया को राहत राशि का चेक दे रहे हैं। सबसे अधिक घर पाठा क्षेत्र में गिरे है।
इस क्षेत्र में आदिवासी व मजदूर तबके के लोग अधिक रहते है। जिन्हें मजबूरी में कच्चे मकानों में रहना पड़ता है। मऊ क्षेत्र व राजापुर क्षेत्र में बारिश व यमुना में आयी बाढ़ से हजारों मकान गिर गये हैं। मऊ के मवाई गांव में मकान गिरने का सिलसिला जारी हैं।
अकेले मवई गांव में डेढ़ दर्जन मकानों मेें ललऊ, बबली, शारदा, भुल्लन, मुर्दी, दिनेश, राजाराम, रामकिशोर, गुलाब, भगत, ननकउना, सेवक व मिठाई लाल बेघर हो गए हैं। वहीं मंदाकिनी में आयी बाढ़ से तरौहा मोहल्ला में एक दर्जन से अधिक मकान गिरे हैं।