चित्रकूट। जालसाजों द्वारा फर्जी दस्तावेजों से दवा कारोबार में 3.26 करोड़ की जीएसटी चोरी के मामले में शासन ने एसआईटी टीम गठित की है। एसआईटी के साथ जिले की भी पुलिस ने जांच शुरू की है।
राज्य कर विभाग को लेनदेन में नौ फर्मों पर संदेह हुआ तो उनकी जांच शुरू की, जांच में सभी फर्में फर्जी मिली थीं। उनका स्थानीय सत्यापन कराया तो किसी का पता भी नहीं मिला। विभाग में पंजीयन कराने ने बाद इन फर्माें ने दिसंबर 2024 में जीएसटीआर रिटर्न दाखिल कर 18.68 करोड़ की आउटवर्ड सप्लाई घोषित कर आईजीएसटी में तीन करोड़ 26 लाख 57 हजार 251 रुपये की फर्जी आईटीसी दिया था।
ऐसे में इन फर्मों ने सरकारी राजस्व की चोरी की। मामले का खुलासा होने के बाद राज्य कर के सहायक आयुक्त निखिल कुमार सिंह ने सदर कोतवाली में सभी फर्माें के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। शासन ने मामले को संज्ञान में लिया और जांच के लिए एसआईटी टीम गठित की। यह टीम जिले की पुलिस के साथ पूरे मामले की जांच करेगी।
मामले की जांच के लिए टीम अब बैंक खाता, फर्म जीएसटी पंजीयन, मोबाइल नंबर समेत अन्य दस्तावेजों को जुटाने में जुट गई। उधर, सीओ अरविंद कुमार वर्मा ने बताया कि फर्मों ने कैसे बिल बनाकर आईटीसी किया है। फर्माें ने बिना सामान खरीदे बिल लगाकर जीएसटी चोरी की है। कब रजिस्ट्रेशन कराया है, तभी पूरे मामले की जांच की जा रही है।