मऊ (चित्रकूट)। खरीफ सीजन की शुरुआत में नकली खाद के कारोबार का एक बार फिर भंडाफोड़ हुआ है। पांच साल पहले इसी तरह के अपराध में पकड़े गए श्यामू केसरवानी को एक बार फिर उसी पुराने ठिकाने पर नकली खाद के धंधे में लिप्त पाया है। कृषि विभाग ने आरोपी श्यामू केसरवानी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है, जिससे प्रशासन की सतर्कता और नकली खाद के धंधे के पनपने पर सवाल खड़े हो गए हैं।
पुलिस के अनुसार, वर्ष 2021 में सुरौंधा गांव के सुरजीपुरवा में एक निर्माणाधीन मकान से नकली खाद के कारोबार का खुलासा हुआ था। उस समय पुलिस ने श्यामू केसरवानी और उसके भाई राम केसरवानी को गिरफ्तार किया था। इस कार्रवाई में 310 बोरी कथित खाद, चार सिलाई मशीनें, बिल्टी, पैड, धागा और बड़ी संख्या में खाली बोरियां बरामद की गई थीं। बरामद बोरियों में अन्नदाता जिब्रो, उर्वरक, करवाद बलरामपुर चीनी मिल, स्वास्तिक उर्वरक, अन्नदाता सल्फोनिक, धनराज लिखी और इफको डीएपी जैसे विभिन्न ब्रांडों की खाद शामिल थी। उस समय आरोप था कि दूसरे राज्यों से लाई गई खाद को चीनी की बोरियों में भरकर इफको डीएपी की बोरियों में पैक किया जाता था और फिर इसे डीएपी के नाम पर बेचा जाता था। इस मामले में आरोपियों के खिलाफ आवश्यक अधिनियम और धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
पांच साल बाद फिर वही कहानी
करीब पांच साल बाद बुधवार को एसडीएम मऊ रामऋषि के नेतृत्व में कृषि विभाग की टीम ने सुरौंधा गांव में फिर से भारी मात्रा में नकली खाद का जखीरा और खाली बोरियां बरामद की हैं। इस बार भी मुख्य आरोपी श्यामू केसरवानी ही है, जिसके खिलाफ एक बार फिर प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस घटना ने पुराने मामले की यादें ताजा कर दी हैं और नकली खाद के धंधे में लिप्त माफियाओं के हौसले को दर्शाती है। फिलहाल, बरामद उर्वरक असली हैं या नकली, इसकी पुष्टि नमूनों की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
किसानों की चिंता और भारतीय किसान यूनियन की मांग
इस घटना पर भारतीय किसान यूनियन ने गहरी चिंता व्यक्त की है। भाकियू के तहसील अध्यक्ष अजीत कुमार शुक्ला ने कहा कि ऐसे आरोपियों पर सख्त कार्रवाई न होने के कारण ही वे बार-बार मिलावटखोरी का कार्य करते हैं। उन्होंने किसानों की ओर से उम्मीद जताई कि इस बार प्रशासन ऐसे माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाएं रुकेंगी और किसानों को नकली खाद से होने वाले भारी नुकसान से बचाया जा सकेगा।
वर्जन
अवैध रूप से संचालित खाद फैक्ट्रियों और दुकानों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। नियम तोड़ने पर प्राथमिकी संबंधित अधिनियम के तहत दर्ज होती है। जब्त सामग्री का पूर्ण विवरण और मात्रा दर्ज कर उसे सील कर दिया जाता है। पूर्व में कार्रवाई के बावजूद पुनः संचालन के मामले की जांच की जाएगी। यदि किसी अन्य के नाम पर लाइसेंस बनवाकर यह कार्य किया जा रहा था तो उसकी भी जांच होगी। -जीतलाल गुप्ता, उप कृषि निदेशक