चित्रकूट। रामायण मेले में रामचरित मानस में शबरी प्रसंग और सत्संग की महिमा बताई। छिंदवाड़ा से आए संत सीताराम शरण रामायणी ने कहा कि रामचरित मानस में शबरी का चरित्र गुरु के वचनों पर दृढ़ आस्था और आराध्य के प्रति गहरे समर्पण का पाठ पढ़ाता है, जिसके कारण शबरी हमेशा श्रीराम की भक्ति में लीन रही। उनके आने का इंतजार करती रही। यही कारण रहा कि भगवान श्रीराम ने शबरी को दर्शन दिया, जिससे उसका जीवन धन्य हो गया।
कथा व्यास साध्वी निहारिका ने संतो के स्वभाव के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि संत हृदय नवनीत समाना। चित्रकूट की सती अनुसुइया ने अपने सतीत्व के बल पर त्रिदेवों को पुत्र बना लिया था। सुल्तानपुर के डॉ. विजय बहादुर सिंह ने भी चित्रकूट तीर्थ स्थान की महिमा की जानकारी दी। इसके अलावा कई और भी प्रसंग सुनाए गए।