फोटो-14- परिचय- कोषागार विभाग में पूछताछ के लिए पहुंची एसआईटी की टीम। संवाद
कोषागार घोटाला
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। कोषागार विभाग के 43.13 करोड़ के घोटाले में एसआईटी ने जांच में तेजी पकड़ी है। शनिवार को जांच टीम ने वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह ने चार घंटे तक जानकारी ली। इस दौरान उनके कार्यकाल में पटल से किए गए भुगतान और उनके भी डिजिटल हस्ताक्षर का मिलान किया गया। 2014 के 50 अन्य पेंशनरों की फाइलों में विभागीय अधिकारियों के पटल से आने वाले भुगतान की जानकारी ली।
कोषागार घोटाला मामले से जुड़े सारे दस्तावेजों के संग एसआईटी ने अपने सारे तथ्य भी ईडी को भेज दिए हैं, लेकिन उसकी जांच अभी जारी है। शनिवार को अवकाश के बाद भी कोषागार विभाग कार्यालय खुला और वरिष्ठ कोषाधिकारी के अलावा एकाउंटेट योगेंद्र, राजेश व राजबहादुर को भी उनके कार्यकाल में हुए भुगतान की फाइल के साथ जांच टीम ने बुलाया। सूत्रों के अनुसार इसमें सबसे प्रमुख यह रहा कि मृतकों के खाते में करोड़ों रुपये इनके कार्यकाल में भी पटल से ही पास कर भेजे गए हैं। बैंक से भुगतान होने की प्रक्रिया और पूरे आंकडों की जानकारी ली गई। जांच टीम का मानना है कि पूरे घोटाला में बिना विभागीय अधिकारी कर्मचारी की रजामंदी से यह नहीं हो सकता था। शुक्रवार को जांच में आए अपर निदेशक कोषागार विष्णुकांत द्विवेदी ने भी संकेत दिए थे कि आरोपी विभागीय अधिकारी कर्मचारियों की संख्या बढ़ सकती है। अभी तक तो चार पर ही कार्रवाई हुई है।
सूत्रों के अनुसार जांच टीम ने पूछताछ के दौरान 2014 से भी रिकार्ड का संकलन करने के लिए कहा है। कुछ पेंशनरों की फाइल का डाटा न मिलने और इनका संचालन 2014 से चलने के कारण जांच का दायरा बढाया गया है। जांच टीम 2014 से तैनात विभाग के एसटीओ एटीओ, एकाउंटेंट व अन्य कर्मचारियों को पूछताछ के लिए नोटिस पहले ही जारी कर चुकी है। अभीतक 2014 से लेकर 2018 के बीच की 50 फाइलों की अलग सूची भी बनाई गई है। इसमें भुगतान करने के कुछ जिम्मेदारों से फोन पर भी टीम ने वार्ता की है। अभी तक फिलहाल इस मामले में 99 के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज है। इसमें एटीओ विकास, एकाउंटेंट अशोक समेत 32 पेंशनर व बिचौलिए जेल में हैं। एक एटीओ संदीप की विवेचना के दौरान मृत्यु हो चुकी है और एक रिटायर्ड एटीओ अवधेश प्रताप सिंह अदालत से स्टे पर है। रिकवरी तीन करोड़ 66 लाख की हो चुकी है।
राह तकते रहे मगर नहीं आए निदेशक
कोषागार घोटाले की आंच विभाग के प्रदेश स्तर के अधिकारियों तक है। इसका ताजा उदाहरण देखने को मिला जब लखनऊ से विभाग के निदेशक वीके सिंह कई जिले के भ्रमण पर रहे, लेकिन चित्रकूट नहीं आए। जानकारी के अनुसार उनके चित्रकूट आने का कार्यक्रम तय था और वह जिले के पड़ोसी जिले कौशांबी व बांदा से होकर गुजरे पर यहां नहीं आए। जबकि यहां का निरीक्षण अपर निदेशक कोषागार विष्णुकांत द्विवेदी ने किया। उन्होंने विभागीय अधिकारियों कर्मचारियाें से लंबी पूछताछ की थी।
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