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Chitrakoot News: कर्वी नगर पालिका में 45 लाख का घोटाला, कार्रवाई के लिए पांच वर्ष से टहल रही फाइल

Mon, 20 Oct 2025 12:45 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
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चित्रकूट। कर्वी नगर पालिका परिषद में करीब 45 लाख रुपये का वित्तीय घोटाला सामने आया है। डीएम के आदेश पर गठित जांच समिति ने 17 अक्तूबर 2019 को चार मामलों में 23 लाख रुपये की अनियमितता की पुष्टि की थी, लेकिन जांच पूरी होने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। हैरानी की बात यह है कि दोष सिद्ध होने के बावजूद नगर पालिका प्रशासन ने एक ठेकेदार को 22 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान कर दिया।
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नगर पालिका परिषद ने मां काली इलेक्ट्रिकल्स नामक फर्म को विद्युत सामग्री की आपूर्ति का ठेका दिया था। ठेकेदार ने फर्जी बिलों और इंजीनियर के जाली हस्ताक्षरों के आधार पर भुगतान कराया। माप पुस्तिका तैयार होने से पहले ही भुगतान कर दिया गया। जांच में पोलों का वजन मानक से कम पाया गया और कई पोलों के फाउंडेशन अधूरे मिले। समिति ने इस कार्य में 11 लाख 50 हजार रुपये की वित्तीय अनियमितता दर्ज की।



लकड़ी की आपूर्ति के लिए एक ही दर पर दो बार टेंडर जारी कर भुगतान किया गया। पहले 1 लाख 72 हजार रुपये और बाद में 1 लाख 90 हजार रुपये का भुगतान हुआ। दरें समान होने के बावजूद मूल्य वार्ता (नीगोसिएशन) की प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। समिति ने इस मामले में 3 लाख 62 हजार रुपये की अनियमितता पाई और इसे निजी लाभ पहुंचाने की मंशा से किया गया कार्य बताया।
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नगर के कई वार्डों में अधूरे कार्यों का लगभग अस्सी प्रतिशत तक भुगतान कर दिया गया। वार्ड 23 में नाली और सीसी रोड का निर्माण बिना हैसियत प्रमाण पत्र और धरोहर धन जमा किए ठेकेदार से कराया गया। समिति ने इस कार्य में 4 लाख 80 हजार रुपये की अनियमितता पाई।



शिकायतकर्ता सुशील श्रीवास्तव का आरोप है कि इस प्रकरण में गंभीर बात यह रही कि जांच रिपोर्ट आने के बाद भी नगर पालिका प्रशासन ने अपात्र ठेकेदार को 22 लाख रुपये का और भुगतान कर दिया, जिससे घोटाले की कुल राशि 45 लाख रुपये तक पहुंच गई।



वर्जन



इस प्रकरण में अद्यतन स्थिति के बारे में जानकारी नहीं है। फाइल देखने के बाद ही मौजूदा स्थिति के बारे में कुछ बता पाऊंगा।

उमेश चंद्र एडीएम



आउटसोर्सिंग में कर्मचारियों की आपूर्ति का ठेका इरफान नामक व्यक्ति को दिया गया था, लेकिन सूची में सभासदों के पुत्र और पति के नाम दर्ज थे। यह नगर पालिका अधिनियम के विरुद्ध और हितों के टकराव का स्पष्ट मामला है। समिति ने इस प्रकरण में 2 लाख 10 हजार रुपये की अनियमितता दर्ज की और संबंधितों पर कार्रवाई की अनुशंसा की।



इनसेट में



डीएम की चुप्पी पर सवाल, पांच साल बाद फिर मांगी रिपोर्ट

जांच वर्ष 2019 में पूरी हो चुकी थी, लेकिन अब तक न तो किसी से रिकवरी हुई है और न ही विधिक कार्रवाई शुरू की जा सकी है। जुलाई 2025 में डीएम ने जांच अधिकारी को पत्र लिख कर दोषी पाए गए अध्यक्ष, कर्मचारी व अधिकारी का नाम व पद नाम देने को कहा था। इसी के बाद पूरा प्रकरण ठंडे बस्ते में चला गया।
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