28 सीकेटीपी-9- परिचय- कोषागार विभाग में पेंशन के लिए जीवित प्रमाण पत्र देने वालों की भीड़ को सम
चित्रकूट। कोषागार विभाग में हुए 43.13 करोड़ के घोटाले में नामजद आरोपियों ने खुद पर कानून का शिंकजा कसता देख अब बचाव की जुगत में लग गए हैं। पुलिस गिरफ्त से दूर आरोपी रिटायर्ड सहायक कोषाधिकारी समेत छह अन्य आरोपियों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया है। उधर, जेल में बंद तीन पेंशनरों की जमानत याचिका मंगलवार को जिले की अदालत से निरस्त कर दी गई है।
जिले के कोषागार विभाग में सन 2018 से लेकर 2025 तक के बीच हुए पेंशन घोटाला मामला सामने आने पर विशेष ऑडिट टीम ने जांच पड़ताल की। इसमें पाया गया कि 93 ऐसे संदिग्ध खाते हैं जिनमेंं 43 करोड़ से अधिक धनराशि कोषागार विभाग से भेजी गई। पेंशनर व कोषागार के अधिकारी कर्मचारियों और बिचौलियों की सांठगांठ से इस धनराशि का प्रयोग भी किया गया है। इसमें वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह की तहरीर पर 93 लोगों पर कोतवाली कर्वी में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। जांच के लिए गठित एसआईटी का शिकंजा नामजदों पर कसने का असर है कि 15 दिनों में 32 लोग जेल गए हैं। इसमें निलंबित सहायक कोषाधिकारी विकास सचान व एकाउंटेंट अशोक कुमार भी शामिल हैं। एक सहायक कोषाधिकारी संदीप श्रीवास्तव की मृत्यु हो चुकी है। इस मामले में प्रशासन लगभग साढ़े तीन करोड़ की रिकवरी भी पेंशनरों से की है।
अदालत ने जेल में बंद तीन आरोपियों की खारिज की जमानत अर्जियां
मामले में जेल जाने वाले पेंशनर व बिचौलिए अब जमानत कराने का प्रयास कर रहे हैं। अधिवक्ता आशीष तिवारी ने बताया कि राजापुर क्षेत्र के पेंशनर रुकमनि देवी, निर्मल गर्ग व एक अन्य ने अदालत में जमानत याचिका डाली थी। अदालत ने मामले की गंभीरता देखते हुए तीनों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। इसके अलावा अन्य कई लाइन में हैं। अधिवक्ता ने यह भी बताया कि 15 दिनों से पुलिस के हाथ न लगने वाले रिटायर्ड सहायक कोषाधिकारी अवधेश प्रताप सिंह के अलावा मोहन, केसनिया, जगतनारायण, सावित्री व लल्लू ने हाईकोर्ट से राहत पाने की जुगत लगाई है। इन सब मामलों की जानकारी जांच टीम समेत विभागीय अधिकारी कर्मचारियों को भी है। (संवाद)
कोषागार घोटाला मामले में अब तक 32 लोगों को जेल भेजा गया है इन 32 में 6 बिचौलिया हैं। 24 पेंशनर और दो विभागीय कर्मचारी हैं। 6 बिचौलियों के नाम हैं जो एफआईआर में शामिल नहीं थे। यह विवेचना में सामने आए हैं। अभी इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। जांच व पूछताछ के बाद अन्य को भी जेल भेजा जाएगा। यह सही है कि जेल में बंद व बाहर घूम रहे कुछ नामजद आरोपियों ने अग्रिम जमानत व गिरफ्तारी से बचने के प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए भी एसआईटी व अन्य पुलिस टीम लगातार अदालत के आदेशानुसार काम कर रही है। जरुरी कागजात एकत्र किए जा रहे हैं।
अरुण कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक