डकैतों को मदद देने के मामले में पकड़ा गया सपा नेता अर्जुन सिंह बघेल अलग- थलग पड़ गया है। शनिवार को बांदा जेल में बंद अर्जुन से मिलने कोई बड़ा नेता नहीं पहुंचा। पूर्व में हित साधने वालों ने भी जैसे उसे भुला दिया।
अर्जुन की पत्नी अनीता सिंह बघेल सरैंया वार्ड से जिला पंचायत सदस्य हैं। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव समीप हैं, ऐसे में अर्जुन सिंह एक बार फिर चुनावी मूड में दिख रहा था। पीडब्ल्यूडी के ठेकेदार के रूप में भी उसका वर्चस्व है। कहीं न कहीं वह इसका फायदा राजनीति में भी उठाने की फिराक में था।
दस्यु गौरी यादव को मदद देने के मामले में पकड़े जाने के बाद चर्चा ये भी रही कि वह काफी दिनों से गैंग की सहायता कर रहा था। लेकिन राजनीतिक संरक्षण मिलने के चलते वह बचता रहा। एसपी पवन कुमार ने उसका मोबाइल सर्विलांस पर लगाया तो वह पकड़ में आ गया। अर्जुन को सीतापुर चौकी पुलिस ने गुरुवार रात गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उसके पास से अस्सी हजार रुपये, बाइक, नया मोबाइल और सिम बरामद किया।
अर्जुन सपा का घोषित नेता तो है ही साथ ही उसकी पहचान अन्य पार्टियों के बड़े नेताओं से भी है। लेकिन उसके पकड़े जाने के बाद से जैसे उससे जुड़े नेता भी उससे मुंह फेरते दिखे। शुक्रवार को जब इस संबंध में सपा के पदाधिकारियों से बात की गई तो उनके बयानों से साफ लगा कि कोई भी खुलकर अर्जुन के साथ नहीं आना चाहता। भले ही अपने गाढ़े वक्त में लोगों ने अर्जुन का जायज, नाजायज लाभ लिया लेकिन उसके जेल जाने के बाद ये सब बीती बात हो गई।
शनिवार को बांदा जेल में उससे मिलने और हमदर्दी जताने कोई नेता नहीं पहुंचा। ज्यादातर ने तो यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि वह सपा का कार्यकर्ता जरूर है पर जो जैसा करेगा, वैसा भरेगा। हालांकि अर्जुन सिंह खुद पर लगे आरोपों को गलत और पूरे मामले को राजनीतिक साजिश बता रहा है।