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संस्कार और आचरण का खजाना है भरत चरित्र

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चित्रकूट। संत मोरारी बापू ने रामकथा के तीसरे दिन भगवान भरत का सजीव चित्रण एक संवाद के रूप में कराया। कहाकि भरत जी के नियम व्रत का वर्णन नहीं किया जा सकता। मानस भरत चरित्र में संस्कार चरित्र और आचरण का खजाना भरा पड़ा है। आस्था अनुसार जितना चाहे लूट लो तुम्हें कोई रोकने वाला नहीं है। परमात्मा ने स्वभाव में गरीबी दी हो तो ग्लानि मत करना। हरिनाम उसका सफल होता है जिसका स्वभाव सरल होता है।
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सोमवार को दीनदयाल शोध संस्थान के आरोग्यधाम परिसर में संत मोरारी बापू ने कहा कि मानस के जितने भी प्रेमी है उन सबको एक जगह इक ट्ठा करके उन सब के विविध प्रेम को एकत्रित करें और देखें कि वो सब एक ही जगह भरत में मिलेंगे। परम व्यवस्था का नाम ही परमात्मा है। रामचरित मानस ही सत्य, प्रेम व करुणा का प्रत्यक्ष परिचय है। कथा के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा कुछ प्रश्न भी बापू से पूछे गऐ जिसका उन्होंने समाधान किया। कथा के दौरान विमल जालान वाराणसी, डीआरआई के अनिल जायसवाल, संतोष मिश्रा व राजेश त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
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