मंच पर जगदगुरु रामभद्राचार्य को पुस्तिका भेंट करते रामायण मेला समिति के पदाधिकारी।
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चित्रकूट। राष्ट्रीय रामायण मेला के 52वें महोत्सव का रविवार को पदम विभूषित तुलसी पीठाधीश्वर जगद़गुरु स्वामी रामानंदाचार्य रामभद्राचार्य महाराज ने समापन किया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म विरोधियों द्वारा जो भी प्रचार किया जा रहा है वह मनगढ़ंत है। सनातन न कभी मिटा है और न कभी झुका है।
रामलला के मंदिर निर्माण के लिए उनकी ही याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया। उन्होंने भगवान राम के बारे में बताया कि जाकी रही भावना जैसी तिन्ह मूरत देखी तिन तैसी। कहा कि चित्रकूट में चल रहा रामायण मेला अद्वितीय है। भविष्य में इस मेले को वह भी कराएंगे। इसके पहले मेले के कार्यकारी अध्यक्ष प्रशांत करवरिया, महामंत्री करुणा शंकर द्विवेदी व पूर्व सांसद भैरो प्रसाद मिश्र ने जगद्गुरु का माल्यार्पण कर स्वागत किया। (संवाद)