सावन माह की सोमवती अमावस्या पर रोक के बावजूद चित्रकूट के रामघाट पर मंदाकिनी स्नान को जुटे श्रद्ध
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चित्रकूट। सावन की सोमवती अमावस्या पर प्रशासन की कड़ाई के बाद भी हजारों श्रद्धालु धर्मनगरी पहुंच गए। इन्होंने रामघाट में मंदाकिनी में डुबकी लगाई। रामघाट स्थित मत्यगजेंद्रनाथ मंदिर के बाहर जलाभिषेक और पूजन किया। कामदगिरी के प्रमुख द्वार के पट बंद रहे। श्रद्धालुओं ने बाहर से दर्शन कर कामदगिरी की परिक्रमा की। सुरक्षाकर्मियों ने श्रद्धालुओं को रोक कर घर में पूजन करने के लिए कहा। यह नहीं माने। मंदिरों के बंद होने से बाहर पूजा की।
सोमवती अमावस्या को लेकर धर्मनगरी मेें लॉकडाउन किया गया था। इसके बावजूद हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच गए। यूपी और एमपी के प्रशासनिक अधिकारियों ने इन्हें जगह-जगह रोकने का प्रयास किया। इनसे घर जाकर पूजा पाठ के लिए कहा गया। श्रद्धालु नहीं माने। इन्होंने मंदाकिनी में स्नान किया। मत्यगजेंद्र नाथ मंदिर बंद रहा। इससे बाहर जलाभिषेक कर पूजा पाठ किया गया। कामदगिरी के प्रमुख द्वार के बाहर पूजा की गई। प्रसाद चढ़ाया गया। इसके बाद परिक्रमा की। कुछ जगह भीड़ का दबाव बना। यहां पुलिसकर्मियों ने सक्रियता दिखाई। लोगों को तितर बितर कर दिया। चित्रकूटधाम मंडल के मंडलायुक्त गौरव दयाल, डीएम शेषमणि पांडेय, चित्रकूटधाम मंडल के डीआईजी दीपक कुमार व एसपी अंकित मित्तल ने मेेला क्षेत्र का निरीक्षण किया। बैरियर वाले स्थानों पर ठहरकर लोगों को मास्क पहनने के लिए प्रेरित किया।
संत नवलेश दीक्षित के अनुसार हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने एक अमावस्या आती है। सोमवार के दिन अमावस्या का संयोग सालों में कभी कभार बनता है। यह संयोग स्नान, दान के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
महिला श्रद्धालुओं ने पीपल की परिक्रमा की
चित्रकूट। सोमवती अमावस्या पर महिला श्रद्धालुओं ने पुत्र की दीर्घायु के लिए पीपल की 108 परिक्रमा कर विधि विधान से पूजा की। ग्रामीण क्षेत्रों में पीपल पूजन के लिए भीड़ देखी रही। सोमवती अमावस्या पर पीपल की पूजा कर परिक्रमा की परंपरा सालों पुरानी है। इस बार भी सुबह से महिला श्रद्धालु पीपल के पूजन के लिए पहुंचने लगी थीं। 108 बार परिक्रमा की। दान भी दिया। इस दौरान सामाजिक दूरी का नियम टूटता रहा।