चित्रकूट। साल दर साल सड़क हादसों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। वर्ष 2024 से 2025 में हादसों, मौत व घायलों की संख्या में दोगुना से अधिक का इजाफा हुआ है। सरकार ने सड़क हादसों को कम करने की जिम्मेदारी पांच विभागों को दी है। इसके बाद सड़क हादसों में कोई कमी नहीं आ रही है। जबकि हर साल लाखों रुपये का बजट प्रचार प्रसार के नाम पर खपाया जाता है।
हर साल संभागीय परिवहन, यातायात, शिक्षा सहित अन्य विभाग जागरूकता रैली, नुक्कड़ नाटक, जनसभाएं, स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को सड़क दुर्घटनाओं के बारे में जानकारी देते हैं। वर्ष 2024 में एक जनवरी से लेकर 30 जून तक 108 सड़क दुर्घटनाएं हुई। इसमें 75 लोगों की मौत हुई है। वहीं 83 लोग घायल हो चुके हैं। वहीं 2025 के जनवरी से जून तक में 216 दुर्घटनाएं हुई हैं। इसमें 117 लोगों की मौत हुई है। साथ ही 212 लोग घायल हुए हैं। इनको प्राइवेट व सरकारी स्कूलों में भर्ती कराया गया है। आकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 से 2025 में दोगुना से अधिक सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं। जून माह की बात करे तो 2024 में 14 सड़क दुर्घटनाओं में 12 मौतें व 11 घायल हुए हैं। वहीं 2025 में 40 दुर्घटनाओं में 22 की मौत व 43 घायल हुए हैं। सड़क हादसों में रोक लगाने के लिए प्रशासन जागरूक करने की बात कहता है लेकिन इसका कोई असर नहीं दिखाई देता है। दुर्घटनाओं में कोई लगाम नहीं लग पा रही है।
सड़क दुर्घटना होने के प्रमुख कारण ओवर स्पीड में वाहन चलाना, मोबाइल पर बात करना, नींद आना, खराब सड़क, गलत दिशा में वाहन चलाना सहित अन्य हैं। सभी विभागों के अधिकारी इन बिंदुओं पर रोक लगाने में पूरी तरह से नाकाम हैं। इस कारण लगातार सड़क हादसे बढ़ रहे हैं।
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जिला यातायात प्रभारी शैलेंद्र सिंह ने बताया कि सड़क दुर्घटनाएं बढ़ने का मुख्य कारण महाकुंभ रहा है। इस दौरान जिले में चारों ओर से उम्मीद से ज्यादा वाहनों का आवागमन हुआ। इससे घटनाएं भी बढ़ीं। दूर दूर से वाहन चलाकर आने वाले चालक कभी नींद पूरी न होेने तो कभी लापरवाही से नियमों को तोड़नेके दौरान दुर्घटना के शिकार हुए। दुर्घटनाओं को रोकने के लिए यातायात विभाग, एआरटीओ विभाग से मिलकर संयुक्त अभियान चलाता है।