चित्रकूट। धर्मनगरी की मंदाकिनी नदी में प्रशासनिक प्रतिबंध के बावजूद नावों पर फिल्मी और भोजपुरी गाने बजाए जा रहे हैं। इससे रामघाट पर शाम की आरती के दौरान श्रद्धालुओं का धार्मिक माहौल प्रभावित हो रहा है। हालांकि जिला प्रशासन ने इन गानों के बजने पर पहले ही पाबंदी लगा चुका है। फिर भी नाविक नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।
श्रद्धालु भगवान राम की तपोभूमि में शांति और आध्यात्मिक अनुभूति के लिए आते हैं। नावों में बज रहे तेज आवाज के गीत उनकी आस्था को ठेस पहुंचा रहे हैं। कई श्रद्धालुओं ने इसे धार्मिक वातावरण के साथ खिलवाड़ बताया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारी नियमों का पालन नहीं करा पा रहे हैं। मंदाकिनी में कई नावों पर युवकों को बीच धारा में नाचते हुए भी देखा जा रहा है। इससे धार्मिक गरिमा प्रभावित होती है और हादसे की आशंका भी बनी रहती है।
मानक से अधिक बैठाए जाते यात्री :
सुरक्षा मानकों की बात करें तो नावों पर अधिकतम आठ सवारी बैठाने के निर्देश हैं, पर हकीकत में 10 से 12 यात्री बैठाए जा रहे हैं। ओवरलोडिंग के कारण किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। प्रतिदिन करीब 200 से 250 नावों का संचालन होता है। नियमों का पालन सुनिश्चित कराना प्रशासन के लिए चुनौती है।
फोटो-01 सीकेटीपी 08-गायत्री देवी। संवाद
एमपी की गायत्री देवी ने बताया कि शाम को परिवार के साथ मन शांति के लिए रामघाट में बैठते हैं, लेकिन नावों में भक्ति के अलावा फिल्मी व भोजपुरी गाने बजने से ध्यान भंग होता है। ऐसे गानों पर घाट पर प्रतिबंध होना चाहिए। भगवान के शरण में आने के बाद लोग शांति की तलाश करते हैं।
फोटो-01 सीकेटीपी 09-पवन पांडेय। संवाद
कानपुर के पवन पांडेय ने बताया कि शाम को रामघाट में आरती में पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है। लेकिन नावों में बज रहे गानों से पूजा पाठ करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके बाद इन नावों पर कार्रवाई न होने से नाविक मनमानी कर रहे हैं।
बोले जिम्मेदार-
जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने बताया कि नावों में गानों को लेकर सख्त निर्देश दिए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
फोटो 01सीकेटीपी-07- रात 8.30 बजे मंदाकिनी में नदी में नावे। संवाद
फोटो 01सीकेटीपी-07- रात 8.30 बजे मंदाकिनी में नदी में नावे। संवाद