चित्रकूट। स्वास्थ्य सेवाओं में नर्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। नौ साल से जिले में कार्यरत नर्स शिखा लगभग पांच हजार प्रसव करा चुकी हैं। दो बच्चों को संभालने के साथ ही अपने दायित्व को बखूबी निभाने वाली नर्स शिखा का कहना है कि रात में ड्यूटी अकेले निकलना पड़ता है तो डर भी लगता है, लेकिन दर्द से कराह रही प्रसूताओं और नवजात के कष्ट याद कर सब भूल कर डयूटी करती हैं।
मूल रूप से कानपुर निवासी शिखा सचान की मां आरती भी नर्स थीं। ऐसे में उन्हें घर से ही इस दिशा में काम करने की प्रेरणा मिली। इसके बाद शादी घाटमपुर के हेमंत सचान से हुई। वह भी अस्पताल में नर्स पद पर कार्यरत हैं। इनके दो छोटे बच्चे हैं। दोनों अलग अलग समय पर डयूटी करते हैं और बच्चों के साथ परिवार को संभालते हैं। शिखा बताती हैं कि रात में जब गर्भवती आती हैं या भर्ती प्रसूता की हालत बिगड़ती है तो ज्यादातर समय सहयोगी नर्स, वार्ड बॉय स्वीपर की मदद से ही पूरी स्थिति को संभालना पड़ता है। डॉक्टर के आने के पहले तक कभी प्रसव कराना पड़ जाता है।