चित्रकूट। भगवान श्रीराम की तपोभूमि अब पर्यटन नगरी के रूप में विकसित हो रही है। रामघाट और परिक्रमा मार्ग समेत अन्य तीर्थ स्थानों को इको टूरिज्म के रूप विकसित किया जा रहा है। तुलसी जलप्रपात पर बना प्रदेश का पहला धनुषाकार कांच का ब्रिज लुभा रहा है।
वाल्मीकि आश्रम, तुलसी प्रपात, मड़फा का शिवमंदिर, मऊ के ऋषि आश्रम और रानीपुर टाइगर रिजर्व में पर्यटकों की संख्या बढ़ती जा रही है। रामघाट के सुंदरीकरण और तीर्थ क्षेत्र में होने वाले अन्य कार्यों के लिए 18.30 करोड़ रुपये सरकार ने स्वीकृत किए हैं।
मारकुंडी क्षेत्र में टिकरिया गांव के पास घने जंगल में तुलसी जलप्रपात है। यहां करीब 40 फीट ऊंचे पहाड़ से झरना बहता है। आगे चलकर पानी एक अन्य झरने में बदल जाता है। यह पर्यटकों को खूब लुभा रहा है। यहां धनुषाकार कांच का खूबसूरत पुल बनाया गया है। पर्यटकों के बैठने के लिए छोटा पार्क भी बनाया गया है।
टाइगर रिजर्व पार्क भी आकर्षण का केंद्र
पहाड़ों से घिरे पाठा के रानीपुर टाइगर रिजर्व क्षेत्र को भी पर्यटन के रूप में विकसित कर रहे हैं। यह जंगल चारों तरफ से पहाड़ से घिरा है। यहां का प्राकृतिक नजारा बहुत ही खूबसूरत है। टाइगर रिजर्व क्षेत्र के उप निदेशक एनके सिंह ने बताया कि रानीपुर टाइगर रिजर्व के विकास के लिए करीब 52 करोड़ की कार्ययोजना बनाई गई है। रिजर्व क्षेत्र में वन विभाग ने करीब 12 चेकडैम बनाए हैं। मारकुंडी रेंज के किहुनियां गांव में वन विभाग डेढ़ करोड़ से काम करा रहा है। रानीपुर वन्य क्षेत्र का कोर एरिया 230 वर्ग किलोमीटर और बफर जोन 299 वर्ग किलोमीटर है। टाइगर रिजर्व का क्षेत्रफल 529.36 वर्ग किलोमीटर है। इस जंगल में टाइगर, तेंदुआ, भालू और चीतल जैसे जंगली जानवर रहते हैं, जो पर्यटकों को रोमांचित करेंगे।