फोटो-26सीकेटीपी 01 रामनगर झील पर तैयार हो रहा पॉथवे। संवाद
फोटो-26सीकेटीपी 02 रामनगर झील पर पार्क में लगाए गए आकर्षक झूले। संवाद
- पीपीपी मॉडल पर होगा झील का संचालन, स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। जिले में रामनगर झील संवारी जा रही है। इसे ईको पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। लगभग 80 फीसदी पूरे हो चुके हैं। हालांकि बजट की कमी के कारण कुछ काम रुके हुए हैं। इनके पूरा होते ही पर्यटक झील में बोटिंग का आनंद ले सकेंगे।
भगवान श्रीराम की तपोभूमि में पर्यटकों को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड ने रामनगर स्थित झील को संवारने के लिए करीब चार करोड़ की विकास परियोजना बनाई थी। मंजूरी मिलने के बाद शासन स्तर से करीब एक करोड़ से झील पर काम शुरू कराए। वर्तमान समय में पर्यटन विभाग का करीब 80 फीसदी काम होने का दावा है लेकिन बजट की कमी से कुछ काम ठहरे हैं। हालांकि अधूरे काम के लिए शासन से पैसा मांगा गया है।
बजट मिलते ही वहां पर अधूरे कार्यों को पूरा कराया जाएगा। इस परियोजना के पूरा होने से चित्रकूट में पर्यटन को नया आयाम मिलेगा। पर्यटक रामनगर झील में बोटिंग का आनंद ले सकेंगे। यह पहल न केवल पर्यटकों को आकर्षित करेगी बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा करेगी। झील का ईको पर्यटन स्थल के रूप में विकास क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को भी संरक्षित करेगा।
रामनगर झील को संवारने के बाद बोर्ड इसका संचालन पीपीपी मॉडल पर कराने की तैयारी में है। इसके लिए बोर्ड ने संचालन के लिए संस्थाओं से आवेदन मांगे हैं। पर्यटकों के लिए झील पर पाथवे, पार्क, बच्चों के खेलने के उपकरण, बैठने की व्यवस्था, शेड, पक्का घाट, रैंप, प्रवेश द्वार, प्रकाश के लिए सोलर लाइटें, झील के चारों को ओर जालीदार बाउंड्री, प्लांटेशन कार्य कराए गए हैं।
बोले जिम्मेदार
धर्मनगरी में पर्यटकों को बढ़ावा देने के लिए रामनगर झील को संवारा जा रहा है। 80 फीसदी काम हो गए हैं। शेष कार्य को पूरा कराकर मार्च से झील का पीपीपी मॉडल पर संचालन कराने की तैयारी है। इसके लिए संस्थाओं से आवेदन मांगे गए हैं।- आरके रावत, संयुक्त निदेशक, पर्यटन विभाग।