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चित्रकूटः देवोत्थान एकादशी पर दीयों से जगमगाया रामघाट

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रामघाट में मंदाकिनी नदी में देवोत्थान एकादशी के दौरान विहंगम दृश्य। - फोटो : CHITRAKUTT
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चित्रकूट/खोही। देवोत्थान एकादशी का पर्व बुधवार को जिले में धूमधाम से मनाया गया। धर्मनगरी स्थित रामघाट में श्रद्धालुओं ने दीप जलाकर कामदगिरि की परिक्रमा की। इस दौरान हजारों दीयों की रोशनी से रामघाट जगमगा उठा।
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देवोत्थान एकादशी व देव दीपावली पर्व पर लोगों ने घरों में दीप जलाए और महिलाओं ने व्रत रखकर विधिविधान से पूजन किया। बाजारों में सुबह से गन्ना व सिंघाड़े की खरीद को खासी रौनक दिखी। धर्मनगरी परिक्षेत्र में दूरदराज से आए हजारों श्रद्धालुओं ने रामघाट में दीपदान कर भगवान कामदनाथ की परिक्रमा कर मन्नतें मांगी।
नगर पालिका ने कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए स्काउट व एनसीसी कैडेटों के माध्यम से रामघाट में 11 हजार गोम दीपक जलवाए। इस दौरान चेयरमैन नरेंद्र कुमार गुप्ता व ईओ नरेंद्र मोहन मिश्रा मौजूद रहे। परिक्रमा मार्ग पर दीपकों की कतार व आकर्षक रंगोली का भव्य नजारा रहा।
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आचार्य नवलेश दीक्षित ने बताया कि जितना पुण्य राजसूय यज्ञ करने से होता है, उससे अधिक पुण्य देवउठनी एकादशी के दिन होता है। इसके चार माह पूर्व देवसैनी एकादशी मनाई जाती है। माना जाता है कि भगवान विष्णु समेत सभी देवता क्षीरसागर में जाकर सो जाते हैं।
इसलिए इन दिनों पूजा-पाठ और दानपुण्य के कार्य किए जाते हैं। शुभ कार्य शादी, मुंडन व नामकरण संस्कार नहीं किए जाते हैं। देवउठनी एकादशी को प्रबोधनी एकादशी भी कहा जाता है। इस एकादशी को देवोत्थान एकादशी, देवउठनी, ग्यारस व प्रबोधनी एकादशी आदि नामों से जाना जाता है।
बताया कि एकादशी के दूसरे दिन महिलाएं तड़के गन्ने से सूपा बजाकर ईश्वर का आह्वान कर रोग व दरिद्रता को घर से बाहर करने की कामना करती हैं। तुलसी विवाह पर गाजे-बाजे के साथ भक्तों ने परिक्रमा मार्ग पर शोभायात्रा निकाली।
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