विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के तत्वावधान में शनिवार को पंचवटी मंदाकिनी घाट परिसर में हुए कार्यक्रम में जगद्गुरु रामभद्राचार्य को सम्मानित किया गया। जगद्गुरु की शोभायात्रा भी निकाली गई। इस अवसर पर कवि गोष्ठी का भी आयोजन किया गया।
जगद्गुरु की शोभायात्रा कांच मंदिर जानकी कुंड से शुरू होकर आरोग्यधाम पहुंची। यहां पंचवटी मंदाकिनी घाट परिसर में जगद्गुरु रामभद्राचार्य का सम्मान समारोह हुआ। इसमें मुख्य अतिथि दिव्यजीवन दास रहे। विजय विक्रम सिंह ने जगद्गुरु को माल्यार्पण कर सम्मानित किया। सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट जानकीकुंड के निदेशक डा. वीके जैन ने कहा कि रामभद्राचार्य को पद्मविभूषण सम्मान पहले ही मिल जाना चाहिए था। इस अवसर पर कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया। इसमें मुरवल (बांदा) की श्रुति सिंह ने मां सरस्वती की वंदना, भजन और गीत प्रस्तुत किए।
प्रयाग के कवि जयप्रकाश शर्मा प्रकाश ने यहां की महिमा बखानी- प्रभु रहता है कहां बंधु बतलाता हूं, प्रभु की पूजा का विधान समझाता हूं... पंक्तियां सुनाकर भगवान राम की कर्मस्थली चित्रकूट की महिमा बताई। जायस से आए कवि हरिश्चंद्र पांडे हरि जायसी ने मोहा-बुंबुवाई के रोई परी रतना, दुखद दुख देखि दुखइवया/ भहराई परी पिय पायन्ह पै कुल जीवन स्वामि साइगवा... पंक्तियां सुनाईं।
रायबरेली से आए डा. रसिक किशोर सिंह नीरज ने लाख सलाखों के अंदर क्या भाव छिपाएगा/मन का चोर कहां बचता है रचना सुनाई। मुन्ना सिंह गौर ने अपनी रचना में गांवों से लुप्त होते जा रहे खेलों पर प्रकाश डाला। मौके पर क्षेत्र संगठन मंत्री अंबरीष, प्रांत उपाध्यक्ष योगेश तिवारी, उमेश पोर वाल, दीपक पांडे, नीलांशु चतुर्वेदी, प्राची, रंजना उपाध्याय, राकेश शुक्ल, दुर्गेश तिवारी, शुभम राय त्रिपाठी, प्रदीप अवस्थी आदि मौजूद रहे।