रामचरित मानस व्यक्ति को जीवन जीने की कला सिखाती है।
यह कथा सुरसरि से भी अधिक फलदायी है। ये बातें कथा वक्ता महेंद्र कुमार ने
रामघाट स्थित निर्मोही अखाड़ा में कथा के दौरान कही।
उन्होंने कहा
कि रामचरित मानस में नवरस हैं और सुरसरि गंगा में एक। इस कारण राम कथा रूपी
गंगा अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपने जीवन में
रामचरित मानस को केंद्र बिंदु मानकर उसके पात्रों श्रीराम, सीता, भरत के
चरित्रों का अनुसरण करना चाहिए।
निर्मोही अखाड़ा के अधिकारी
दीनदयाल दास ने बताया कि हर साल यहां पर पुरुषोत्तम मास के अवसर पर
प्रात:काल से वैदिक मंत्रोच्चारण से रुद्राभिषेक और रामकथा का आयोजन कराया
जाता है।
इसके पूर्व गाजे बाजे के साथ शोभायात्रा निकाली गई।
शोभायात्रा रामघाट से होती हुई कथास्थल पहुंची। कथा वक्ता ने पहले दिन
श्रवण कुमार की कांवर कथा, शिव विवाह, श्रीराम जन्मोत्सव, बाल लीला,
श्रीराम विवाह आदि प्रसंगों का सुंदर वर्णन किया।
चित्रकूट।
तीर्थक्षेत्र के भरत मंदिर में पार्थिव शिवपूजन और केशवगढ़ में शतचंडी यज्ञ
और महा मृत्युंजय जाप का अनुष्ठान किया जा रहा है। यह जानकारी महंत
दिव्यजीवन दास ने दी। उन्होंने बताया कि संसार के सभी यज्ञों में जप यज्ञ
श्रेष्ठ है। इसके अलावा रोगों के लिए महा मृत्युंजय जाप रामबाण है।