रुखमा खुर्द के मजरे गौतमपुर के कोल आदिवासियों ने खाते खुलवाने और अनुदान दिलाने के नाम पर सचिव साधन सहकारी समिति पर धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है उनसे सादे कागज पर हस्ताक्षर कराकर ऋण के नाम पर बैंक से लाखों रुपये निकाल लिए गए।
रुखमा खुर्द के मजरे गौतमपुर के कोल आदिवासियों ने बताया कि इन लोगों के नाम से नौ मार्च 2015 को पचास-पचास हजार रुपये का ऋण निकाला गया। गौतमपुर में कोलों का गुजारा मजदूरी से होता है। ग्रामीणों ने बताया कि सचिव साधन सहकारी समिति विजय कुमार पांडे ने खाता खुलवाने और अनुदान दिलाने के नाम पर कोआपरेटिव बैंक की शंकर बाजार कर्वी स्थित शाखा में उनसे सादे कागजों में दस्तखत करा लिए। कुछ को पांच हजार तो कुछ को सात हजार रुपये दिए। जब सचिव से पासबुक मांगी तो उन्होंने टरका दिया।
बाद में जानकारी की गई तो पता चला कि सचिव ने उन लोगों के नाम से पचास-पचास हजार रुपये ऋण निकाल लिया है। अब परेशान ग्रामीणों ने कोआपरेटिव बैंक के मैनेजर के अलावा तहसील दिवस में जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई है। शांतिलाल ने बताया कि उनका पुत्र अरुण कुमार रुखमा खुर्द साधन सहकारी समिति बहिलपुरवा का निर्वाचित अध्यक्ष है।
उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पुत्र ने जब इस काम में सहयोग से इंकार किया तो साजिशन उसके हस्ताक्षरों की मान्यता समाप्त कर उपाध्यक्ष के हस्ताक्षरों से समिति के कार्य करने की मान्यता दे दी गई। इस संबंध में अरुण ने संयुक्त आयुक्त एवं संयुक्त निबंधक सहकारिता, चित्रकूट धाम मंडल को पत्र भी भेजा पर कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके अलावा सहायक आयुक्त और सहायक निबंधक सहकारिता से भी विजय बाबू पांडे की जांच करने की मांग की है।
इनके साथ हुई धोखाधड़ी
ललुवा पुत्र दुखी, छक्कीलाल पुत्र चैता, गजुआ पुत्र मोहन, जीवनलाल पुत्र मंगलवा, लालजी पुत्र शिवमंगल, लालमन पुत्र दूनी, झगड़ू पुत्र महादेव, मंगलवा पुत्र समल, महोविया पुत्र दुल्ला, जोकड़ पुत्र शिवमंगल, लेहदवा पुत्र शमल उर्फ दंगलवा और शिवमंगल पुत्र माधव।
हस्ताक्षर अमान्य करने का पत्र भी भेजा
रुखमाखुर्द साधन सहकारी समिति के अध्यक्ष अरुण कुमार ने समिति के अन्य सदस्यों राजेश कुमार करवरिया, सुजीत कुमार करवरिया आदि के हस्ताक्षर युक्त पत्र शाखा प्रबंधक बांदा जिला सहकारी बैंक को भी भेजा। इसमें मांग की है कि सचिव विजय बाबू पांडे के हस्ताक्षर अमान्य कर दिए जाएं। अनुरोध किया कि इनके हस्ताक्षरों से कोई भुगतान या कार्य न किया जाए। इन सभी ने विजय को वित्तीय अनियमितता व समिति के अभिलेख न दिखाने का आरोपी बताया।
इनका है कहना
मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा हुआ है तो गलत है। जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मैं लखनऊ से आया हूं, पता करूंगा। - लवलेश यादव, उपाध्यक्ष कोआपरेटिव बैंक।
मामला गंभीर
अपर जिला सहकारी अधिकारी (एडीसीओ) ने कहा कि गरीबों के साथ अगर फ्राड किया गया है तो गंभीर मामला है। हालांकि ऋण के कागजात में खतौनी की नकल लगी है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इसमें गरीबों के नाम की फर्जी खसरा खतौनी लगी है तो यह और भी गंभीर मसला हो जाता है। वह जांच करेंगे और अगर सचिव और अन्य लोग दोषी पाए गए तो कठोर कार्रवाई की जाएगी।
मेरे साथ साजिश हुई- सचिव
सचिव विजय पांडे ने कहा कि उनके साथ अध्यक्ष अरुण कुमार और कर्मचारी तीरथ प्रसाद ने साजिश की है। उन्होंने बताया कि फोटो जब काश्तकार देता है, बचत खाता नंबर भी वही देता है। सचिव का काम तो सिर्फ कागजात तैयार कराना होता है। दावा किया कि कोलों ने तो पैसा निकाल भी लिया है। बताया कि अब वह इन लोगों के परिचितों से उलाहना देकर इन कोलों से ही पैसा जमा करवाएंगे। उनसे जब पूछा गया कि इनके नाम तो जमीन नहीं है कैसे इनको लोनिंग कर दी गई, सचिव ने कहा, उनके साथ विश्वासघात हो गया। वह भी गौतमपुर गांव के हैं।