चित्रकूट। अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दहेज हत्या के मामले में पति को दस साल और सास-ससुर को सात-सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी राघवेंद्र प्रताप सिंह सेंगर ने बताया कि मुहम्मद इब्राहीम पुत्र सोहबत अली निवासी महावीर नगर ने सात जून 2014 को थाना मानिकपुर में तहरीर दी थी। इसमें बताया था कि उसने भांजी महरुन निशा की शादी लगभग चार साल पहले महताब अली पुत्र हसन अली निवासी रूरल मानिकपुर से की थी।
पति, ससुर और सास उस पर पचास हजार रुपये लाने का दबाव डाल रहे थे। उसे मारपीट कर प्रताड़ित करते थे। कई बार इस संबंध में थाने में सुलह समझौता भी हुआ। चार जून 2014 की रात उसे सूचना मिली कि उसकी भांजी को ससुराल वालों ने आग लगा दी है। इस पर वह पहुंचा तो उसे तड़पता पाया। ससुरालीजन मौके से फरार थे। भांजी ने उसे बताया कि उसे ससुरालीजनों ने जला दिया है।
अस्पताल में महरुन निशा ने दम तोड़ दिया। उसने तीनों पर दहेज के लिए भांजी की हत्या करने का आरोप लगाया। ज्येष्ठ अभियोजन राघवेंद्र प्रताप सिंह सेंगर ने बताया कि शनिवार को अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट आशीष जैन ने पति महताब अली को दस साल के सश्रम कारावास और सास-ससुर को सात-सात के सश्रम कारावास का दंड दिया गया है। इसके अलावा तीनों को अर्थदंड भी भुगतना पड़ेगा। पीड़ित पक्षकार को प्रतिकर के रूप में दस हजार रुपये देने का आदेश भी न्यायालय ने दिया है।