चित्रकूट। शारदीय नवरात्र में रविवार को माता दुर्गा के चौथे स्वरूप माता कुष्मांडा के दर्शन के लिए भक्त उमड़ पडे़। देर रात तक देवी गीतों की धूम रही । दिन ढलते ही पंडाल जगमगा उठे। प्रसिद्ध कालीदेवी के मंदिरों में पूजा अर्चना को महिलाओं व बच्चों की भारी भीड़ रही।
शहर सहित मानिकपुर, पहाड़ी, राजापुर, मऊ, भरतकूप, शिवरामुपर, खोही, बरगढ़, मारकुंडी, सरैंया, भौंरी आदि क्षेत्रों में माता के आकर्षक पंडाल सजाए गए हैं।
ब्रहृमांड को किया उत्पन्न
चित्रकूट। पंडित नवलेश दीक्षित ने बताया कि माता दुर्गा के चौथे स्वरूप का नाम कुष्मांडा है। अपनी मंद हल्की हंसी से ब्रहृमांड को उत्पन्न करने के कारण इनका नाम कुष्मांडा पड़ गया। इस दिन साधक का मन अनाहृज चक्र में स्थित होता है। पवित्र मन से पूजा उपासना के कार्य में लगना चाहिए।
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रास डांडियां की हो रही प्रतियोगिता
खोही। सद्गुरु ट्रस्ट इस बार 16 वां दुर्गा महोत्सव मना रहा है। जानकीकुंड चिकित्सालय परिसर में दुर्गा प्रतिमा के सामने प्रतिदिन रात्रि में रास डांडिया (गुजरात का गर्वा नृत्य) का आयोजन किया जाता है। जिसमें नर्सिंग स्कूल, विद्याधाम विद्यालय, विद्याधाम पूमाविद्यालय, सद्गुरु पब्लिक स्कूल, रामसंस्कृत महाविघालय के छात्र,-छात्राओं की टीमें गरबा नृत्य करते हैं। रास डांडिया नृत्य का फ ाइनल नवमीं को होगा। फ ाइनल में जो टीम विजेता एवं उपविजेता होगी उसे सद्गुरु मित्र मंडल द्वारा पुरुस्कृत किया जाएगा।