चिल्लीराकस पंप कैनाल की बेराउर के पास की नहर।
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राजापुर(चित्रकूट)। दो दर्जन से अधिक गांव के किसानों की धान की फसल चिल्लीराकस पंप कैनाल से पानी न मिल पाने के कारण किसानों की नर्सरी तैयार नहीं हुई। अमर उजाला में खबर छपने के बाद लघु डाल नहर के अधिकारियों ने दावा किया कि कैनाल चलाया तो गया लेकिन पर्याप्त बिजली आपूर्ति न मिलने तथा यमुना में पानी कम होने से कुछ किलोमीटर तक ही पानी पहुंच पाया।
लघु डाल नहर के अधिशाषी अभियंता अजय मेहरोत्रा ने बिजली विभाग पर ठीकरा फोड़ते हुए कहा कि पर्याप्त बिजली आपूर्ति न मिलने से पंप नहीं चलाया जा सका। बताया कि पंप कै नाल की मशीनें तो दुरूस्त करा ली गई हैं। जून महीने का रिकार्ड बताया कि 14 से 30 जून के बीच बारिश का पानी भरने और बिजली आपूर्ति न मिलने से सात दिन प्रभावित रहा।
इसके अलावा हर दिन चार से आठ घंटे तक पंप चलाया गया है। जिससे सभी नहरों में पानी की आपूर्ति की हुई। इस दौरान लो वोल्टेज भी कैनाल न चल पाने का कारण रहा। कई बार उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। उन्होंने माना कि नहरों की सफाई न होने से पानी टेल तक नहीं जा पा रहा है।
इसके लिए मनरेगा से साढ़े छह लाख का प्रस्ताव भेजा गया है। कहा कि सांसद-विधायक भी यदि अपनी निधि से कुछ धनराशि दे दें तो नहरों की सफाई कराई जाए। जिससे पानी टेल तक पहुंचेगा। उधर, अधिशासी अभियंता के दावों को खारिज करते हुए स्थानीय बेराउर, चिल्ली के किसान शिव शंकर सिंह और संतोष कुमार ने बताया कि कागजी लिखा पढ़ी में कैनाल संचालित है। मई-जून में गांव के तालाबों को ट्यूबवेल चलवाकर भरवाया गया था।