चित्रकूट। धर्मनगरी समेत यूपी-एमपी की सीमा से सटे 100 गांव की जीवनदायनी मंदाकिनी के घटते जलस्तर से सभी चिंतित हैं। मप्र सरकार ने यूपी क्षेत्र के गांवों को जोड़कर इसे पुनर्जीवित कर केन-मंदाकिनी लिंक योजना बनाई है। योजना के अनुसार मंदाकिनी में पानी डायवर्ट करने को 110 किमी लंबी नहर बनेगी। इसके जरिये केन का 250 एमसीएम पानी छोड़ा जाएगा। इस पर दोनों राज्यों में सहमति भी बन गई है, हालांकि विशेषज्ञ इसे उचित नहीं मानते।
यूपी-एमपी क्षेत्र के चित्रकूट की पहचान मंदाकिनी के प्रदूषण व घटते जलस्तर के लिए समाजसेवी से सरकारें और जनप्रतिनिधि गंभीर हैं। इसे लेकर दो बार दोनों प्रदेश की सरकार के प्रतिनिधियों के बीच जल स्रोत बचाने के लिए प्रदूषण व सफाई पर समझौता हुआ। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच साल में मंदाकिनी के जलस्तर को बचाए रखने के प्रयासों में लगभग 20 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं पर हालात नहीं सुधरे। ऐसे में अब दोनों राज्यों की सहमति से तीसरा बड़ा प्रोजक्ट जल्द मंजूर किया है। इसे केन–मंदाकिनी लिंक प्रोजक्ट का नाम दिया गया है।
योजना में दोनों राज्यों के प्रतिनिधियों में सहमति बनी है और प्रारंभिक प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। इसे जल्द ही केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। इससे केन का 250 एमसीएम पानी मंदाकिनी में डायवर्ट किया जाएगा। दोनों राज्य मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश के क्षेत्र में आने वाली मंदाकिनी में 125–125 एमसीएम पानी उपलब्ध कराएंगे। इसके लिए पन्ना जिले में केन पर छोटा बांध बनेगा। साथ ही वहां से सतना के मझगांव तक 110 किमी लंबी नहर बनाई जाएगी। बाद में केन के पानी को मंदाकिनी में छोड़ा जाएगा।
-
बिजली के साथ मिलेगा खेतों को पानी
चित्रकूट। सतना डीएम एस सतीश कुमार ने बताया कि इस योजना से 25 मेगावाट प्रदूषण-मुक्त हाइड्रो पावर उत्पादन होगा। इस योजना से बिजली भी तैयार होगी। इससे स्थानीय ऊर्जा आवश्यकता को मजबूती मिलेगी। इसके अलावा चित्रकूट विधानसभा क्षेत्र में 18,000 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता विकसित होगी। 125 एमसीएम पानी सिंचाई के लिए उपलब्ध होगा। साथ ही मंदाकिनी का जलस्तर भी बढ़ेगा। इस मामले में चित्रकूट डीएम पुलकित गर्ग ने बताया कि इस संबंध में सिंचाई विभाग से जानकारी मांगीं गई है।
उधारी से कब तक बचाएंगे नदी
चित्रकूट। इस योजना को लेकर विशेषज्ञों ने रोष जताया है। महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के पर्यावरण संकाय के प्रो. घनश्याम गुप्ता बताते हैं कि मंदाकिनी को बचाने के लिए फिर से करोड़ों रुपये ठिकाने लगाने की योजना है। आखिर कब तक उधार लेकर लोगों को आचमन के लिए मंदाकिनी का जल उपलब्ध कराएंगे। नदी के किनारे सुरक्षित हों, जंगल व पर्वत की रक्षा की जाए तो खुद ही नदी सुरक्षित रहेगी। इसके पूर्व नर्मदा का पानी भी मंदाकिनी में लाने की योजना बनी थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। समाजसेवी अजीत सिंह व अरुण गुप्ता ने कहा कि नदी का सीमांकन कराकर यह तलाशना चाहिए कि यह क्यों सूख रही है। (संवाद)
फोटो 26 सीकेटीपी 03- मंदाकिनी नदी का दृश्य। फाइल फोटो