अंधविश्वास के चक्कर में एक गर्भवती की जान चली गई। उसे दर्द होने और न दिखाई देने पर परिजन डाक्टर के पास न ले जाकर झाड़-फूंक के चक्कर में पड़े रहे और पीड़िता कराहती रही। शुक्रवार रात उसकी सांसें थम गईं। मामले की सूचना पुलिस को दी गई है। अब तक किसी ने कोई तहरीर नहीं दी है।
दुबारी थाना पहाड़ी निवासी अनुसूचित जाति की आरती (25) पत्नी कुशल गर्भवती थी। उसका यह पहला बच्चा था। उसे अक्सर पेट में दर्द रहता था और आंखों से दिखना बंद हो जाता था। इस पर परिजनों ने समझा कि गर्भवती पर भूतप्रेत का साया है। नासमझी में वे लोग उसे डाक्टर के पास नहीं ले गए और ओझा के चक्कर में पड़ गए। गांव में ही उन्होंने आरती की झाड़-फूंक करानी शुरू कर दी।
इसके चलते उसकी तबीयत और खराब हो गई, इसके बाद भी ये लोग चिकित्सक के पास नहीं गए। दर्द से तड़प रही आरती ने शुक्रवार देर रात दम तोड़ दिया। ग्रामीणों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी तो कुछ पुलिस कर्मी घर पहुंचे। ममसी से मृतका का पिता हीरालाल भी वहां पहुंचा। हालांकि किसी ने अब तक पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई है।
जागरूकता की कमी बनी कारण
इस संदर्भ में डा. कमलेश राजपूत, प्रभारी चिकित्साधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहाड़ी ने बताया कि लेबर पेन के समय झटके आदि की वजह से पेट में दर्द ज्यादा होता है। कई बार गर्भवती को दिखना भी बंद हो जाता है। गला सूखने लगता है। ऐसा गर्भवती महिला के अत्यधिक कमजोर होने की वजह से होता है। ऐसे में परिजनों को झाड़फूंक के चक्कर में पड़ने के बजाए किसी चिकित्सक के पास जाना चाहिए। आरती की मौत परिजनों में जागरूकता की कमी और अज्ञानता के कारण हुई है।