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विधानसभा चुनाव पर डकैतों का साया

Mon, 09 Jan 2017 11:26 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला चित्रकूट
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प्र‌तिकात्मक
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विधानसभा चुनाव से पहले 11 दिन में चार वारदातें कर डकैतों ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। हालांकि हर चुनावी सीजन में पाठा व तराई क्षेत्रों में डकैतों की चहलकदमी बढ़ती देखी गई है। कुख्यात ददुआ, ठोकिया, रागिया व बलखड़िया के मारे जाने के बाद से अभी फिलहाल किसी गैंग ने विधानसभा चुनाव में कोई हस्तक्षेप नहीं किया है। लेकिन अंतरप्रांतीय सवा पांच लाख के इनामी डाकू बबुली कोल गैंग ने जिस तरह ताबड़तोड़ वारदात की हैं, उससे चुनाव में भी इस गिरोह के बाधा पहुंचने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
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विधानसभा चुनाव की अधिसूचना चार जनवरी को जारी की गई थी। इसके पहले डाकू बबुली कोल गैंग ने तीन दिन के अंदर दो स्थानों पर दहशत फैलाई थी। 29 दिसंबर की शाम को मारकुंडी थानाक्षेत्र के छेछरिहा जंगल से सर्दी से बचने को लकड़ी काटने गए सात ग्रामीणों को पकड़कर लाठियों से पीटा था। उन्हें यह भी चेतावनी दी थी कि पुलिस को सूचना दी तो जान से हाथ धोना पड़ेगा। दो दिन तक पिटे ग्रामीण मानिकपुर अस्पताल में इलाज कराते रहे। इस घटना के दो दिन बाद 31 दिसंबर को जारोमाफी के कोटेदार को धमकी भरा पत्र भेजकर एक लाख रुपये रंगदारी मांगी और धमकी भी दी। इसके बाद से पुलिस गश्त तो ग्रामीण क्षेत्र में तेज हो गई लेकिन डकैतों का मूवमेंट जारी रहा।

पांच जनवरी की रात को इस गैंग ने बहिलपुरवा थानाक्षेत्र के कैलहा गांव में कोटेदार को धमकी दी। कोटेदार के न मिलने पर डकैतों ने उसकी पत्नी व पुत्र की बेरहमी से पिटाई कर गैंग की मंशानुरूप राशन सामग्री बांटने की धमकी दी। इसके बाद आठ जनवरी की रात को इसी थानाक्षेत्र के छीतूपुर गांव में आटा चक्की संचालक के घर के बाहर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दहशत फैलाई । इन घटनाओं केा देखते हुए जानकार मानते हैं, कि डकैत चुनाव के दौरान भी निर्दोष ग्रामीणों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। चुनाव में भी दखल दे सकते हैं। समाजसेवी आलोक द्विवेदी व बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा के जिला संयोजक शंकर मणि वर्मा ने बताया कि डकैतों पर अंकुश लगाने में स्थानीय पुलिस ज्यादातर नाकाम रही है।
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