फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मोक्ष और शांति के लिए दार्शनिक चिंतन आवश्यक: आलोक कुमार

Sat, 21 Mar 2026 12:21 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
विज्ञापन
फोटो 20 सीकेटीपी 36 कार्यक्रम में बोलते वक्ता। संवाद - फोटो : फुरसतगंज ​स्थित म​स्जिद में नमाज अदा करते अकीदतमंद।
विज्ञापन
चित्रकूट। जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय में दर्शन परिषद का 40वां अधिवेशन आयोजित हुआ। अधिवेशन का दूसरा दिन भारतीय दर्शन के महत्व पर केंद्रित रहा। प्रो. देवकीनंदन द्विवेदी की स्मृति में व्याख्यान माला भी हुई।
विज्ञापन




लखनऊ विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर रमेश चंद्रा ने अपने शोध अध्ययन प्रस्तुत किए। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने अधिवेशन की सफलता की कामना की। उन्होंने भारतीय दर्शन को वैश्विक दृष्टि के लिए महत्वपूर्ण बताया। स्वामी रामभद्राचार्य ने आस्तिक दर्शनों के महत्व पर जोर दिया। कुलपति प्रोफेसर शिशिर कुमार पांडेय ने तकनीकी सत्र की अध्यक्षता की। उन्होंने समसामयिक समस्याओं के समाधान में दार्शनिक सिद्धांतों की आवश्यकता बताई। प्रोफेसर पांडेय ने कहा कि भारतीय दर्शन में समस्त समस्याओं का समाधान निहित है। भारतीय विश्वविद्यालय संघ के संयुक्त सचिव आलोक कुमार मिश्र ने दार्शनिक चिंतन को मोक्ष और शांति के लिए आवश्यक बताया।



शोध पत्र और सांस्कृतिक कार्यक्रम

शिक्षा समूह के वरिष्ठ विचारक बालमुकुंद ने भारतीय ग्रंथों को विश्वविद्यालय में स्थापित करने का सुझाव दिया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में सनातन परंपरा लागू करने की आवश्यकता बताई। अधिवेशन में ''विपश्यना'' पर आयोजित सत्र में कई विदेशी विद्वानों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए। विभिन्न सत्रों में कुल 27 शोध पत्रों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। सायंकालीन सत्र में उत्तर प्रदेश संस्कृति मंत्रालय द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम में नृत्य और गायन शामिल थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें