चित्रकूट। कोषागार विभाग के 43.13 करोड़ के घोटाले में जालसाज बेहद शातिर थे, तभी तो अपने नाते-रिश्तेदारों व परिचितों के नाम से कई बैंकों में पेंशनर के समानांतर पेंशन खाते खुलवाएं, फिर उन खातों में धड़ाधड़ ट्रेजरी से सरकारी रकम भेजी गई। शातिर खातों से सरकारी रकम निकालकर दोनों हाथों से लुटाते रहे। मामला खुला तो अब पकड़ में आए आरोपियों ने किस तरह से सरकारी रकम हड़पी, वो राज उगल रहे हैं। इससे घोटाले में नामजद आरोपियों की संख्या बढ़नी शुरू हो गई है। अभी तक इस मामले में 97 नामजद थे। शनिवार को इसमें दो और संख्या बढ़ गई है, जिन्हें सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। ऐसे में घोटाले में नामजद की संख्या 99 हो गई है। वहीं 10 और निशाने पर हैं।
पेंशनर के खाते के समानांतर बैंक खाते खोलकर पेंशन की राशि कोषागार विभाग से ट्रांसफर कराने का काम कई बिचौलिए कर रहे हैं। शनिवार को पुलिस ने दीपक पांडेय व रणविजय यादव को जेल भेजा। जांच में पता चला कि यह पेंशनर नहीं हैं। साथ ही यह नामजद 97 लोगोंं में भी शामिल नहीं थे। यह वह थे, जो पेंशनर मां लक्ष्मी व सहोद्रा देवी के अतिरिक्त कुछ अन्य लोगोंं के बैंक खाते का संंचालन करते थे। इन्होंने अपने खाते भी कोषागार विभाग व बैंक के अधिकारियों की सांठगांठ से खाते खोले और पेंशन की धनराशि ट्रांसफर कराते थे। पेंशनरों से मिलकर उनके हिस्से की धनराशि समय से देते थे जिससे पेंशनरों को ज्यादा शक नहीं हुआ। ऐसे में अब यह सवाल भी पुलिस के सामने आ गया है कि नामजद के अलावा कई और नाम सामने आ सकते हैं।
रविवार को एसआईटी ने पूरे दिन खातों की जांच व अन्य कागजात का मिलान कराया। 10 पेंशनरों से पूछताछ भी की। इसमें सामने आया है कि अभी 10 बैंक खाते और संदिग्ध हैं। जिसमें कोषागार विभाग से धन जाता था जबकि यह खाते पेंशनर के नाम भी नहीं हैं। इन 10 लोगों की पुलिस अब तलाश कर रही है। जांच अधिकारी सीओ सिटी अरविंद वर्मा व सहायक अजीत पांडेय ने बताया कि पूछताछ व कागजात मिलान से कई नई जानकारी आ रही है। ऐसे में आरोपियों की संख्या बढ़ सकती है।
बिना घालमेल के खाता खुलना संभव नहीं
एसबीआई के रिटायर्ड मैनेजर चित्रकूट निवासी रावेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि बैंक खाता तो दूसरे के नाम से खोलना आसान है, लेकिन उसमें पेंशनर की फोटो या कोषागार विभाग से धनराशि आना यह कोषागार विभाग के अधिकारी या कर्मचारी की सांठगांठ के बिना संभव नहीं है। इसमें कुछ बैंक के अधिकारी कर्मचारी का भी आंशिक सहयोग हो सकता है।
इस मामले में चार विभागीय अधिकारी कर्मचारी व 93 पेंशनर व सहयोगियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज है। अब आरोपियों की संख्या बढ़कर 99 हो गई है। दस और संदिग्ध नाम सामने आ रहे हैं। ऐसे में पूरी संभावना है कि आरोपियों की संख्या बढे़गी।
- सत्यपाल सिंह, एएसपी
पेंशनरों से पूछताछ
चित्रकूट। रविवार को पुलिस की जांच जारी रही। दस लोगों से पूछताछ की गई। उनके बैंक खाते व इसमें से निकाली गई धनराशि को लेकर पूछताछ की गई। एसआईटी के सामने पेंशनर ने रुपये निकालने वालों के जो नाम बताए उन्हें भी बुलाकर पुलिस ने पूछताछ की। दस पेंशनरों में चार ने अपने ही परिचित के चार लोगों के नाम बताए, जो उनके खाते से रुपये निकालकर लाते थे और पेंशन की धनराशि के अलावा 20 प्रतिशत अतिरिक्त धनराशि बोनस कहकर देते थे। बाकी 80 प्रतिशत में विभागीय कर्मचारी अधिकारी के साथ बिचौलिया का हिस्सा होता था। पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने बताया कि रविवार होने से रिकवरी भी नहीं हो पाई और जांच में किसी को जेल नहीं भेजा गया है। (संवाद)