फोटो 01 सीकेटीपी-07-पार्थिव शरीर को तिरंगा झंडा ओढ़ाकर दिया राजकीय सम्मान। संवाद
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चित्रकूट/खोही। पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ नेत्र चिकित्सक और सदगुरु नेत्र चिकित्सालय के निदेशक डॉ. बीके जैन का रविवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनका निधन 27 फरवरी 2026 को शाम चार बजे गंभीर बीमारी के चलते हुआ था। उनके निधन से चित्रकूट सहित समूचे विंध्य अंचल में शोक की लहर दौड़ गई।
डॉ. जैन का पार्थिव शरीर 28 फरवरी 2026 को चिकित्सालय परिसर में अंतिम दर्शन हेतु रखा गया। चित्रकूट समेत आसपास के हजारों लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। 1 मार्च 2026 की सुबह चिकित्सालय परिसर से उनकी अंतिम यात्रा निकली। इसमें भारी संख्या में लोग शामिल हुए। यात्रा एसपीएस मैदान पहुंची, जहां उन्हें तिरंगे में ओढ़ाकर पुलिस सम्मान दिया गया। बाद में परिसर में उनके बेटों जिनेश जैन व डॉ. इलेश जैन ने नम आंखों से मुखाग्नि दी। अंतिम विदाई में सतना जिलाधिकारी डॉ. सतीश चंद्र, चित्रकूट जिलाधिकारी पुलकित गर्ग, पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह उपस्थित थे। मध्य प्रदेश के चित्रकूट विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार समेत अन्य जनप्रतिनिधि, साधु-संत और नागरिक भी मौजूद रहे।
सेवा और पद्मश्री सम्मान
डॉ. जैन को अंधत्व निवारण और चिकित्सा सेवा में योगदान हेतु 27 मई 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पद्मश्री से नवाजा। उन्होंने संत रणछोड़ दास जी के सदगुरु सेवा संघ के ट्रस्टी और नेत्र चिकित्सालय के निदेशक के रूप में कार्य किया। उनके मार्गदर्शन में तारा नेत्रदान यज्ञ जनांदोलन बना, जिससे लाखों मरीजों को नई रोशनी मिली। उन्होंने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई जिलों को मोतियाबिंद मुक्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
चित्रकूट को बनाया कर्मभूमि
सतना जिले में जन्मे डॉ. जैन ने रीवा से चिकित्सा स्नातक और मुंबई से नेत्र रोग में स्नातकोत्तर उपाधि ली। उज्ज्वल भविष्य के अवसरों के बावजूद उन्होंने सुविधा की बजाय सेवा का मार्ग चुना। वे 1970 के दशक में चित्रकूट पहुंचे, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित थीं। उन्होंने इस तपोभूमि को कर्मभूमि बनाया और उसी धरा पर अनंत ज्योति में विलीन हो गए।
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