ज्येष्ठ मास की शनिचरी अमावस्या के पावन अवसर पर शनिवार को भगवान राम की तपोस्थली चित्रकूट में आस्था का अभूतपूर्व संगम देखने को मिला। धर्मनगरी के कण-कण में भक्ति की रसधारा बही, जहाँ देश के कोने-कोने से आए पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने मां मंदाकिनी के शीतल जल में पुण्य की डुबकी लगाई। स्नान के पश्चात भक्तों ने भगवान कामतानाथ स्वामी के चरणों में मत्था टेककर सुख-समृद्धि की कामना की और पंचकोसीय परिक्रमा पूरी की।
भोर की पहली किरण के साथ शुरू हुआ 'स्नान पर्व'
शनिवार तड़के भोर के तीन बजते ही रामघाट, भरतघाट और बालघाट पर श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। 'हर-हर महादेव' और 'जय श्रीराम' के गगनभेदी उद्घोष से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्ज से भर उठा। ज्येष्ठ की तपती गर्मी के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। मां मंदाकिनी में स्नान के बाद भक्तों ने तट पर स्थित मंदिरों में विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया और अपनी सामर्थ्य अनुसार दान-पुण्य कर धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया।
कामतनाथ स्वामी की परिक्रमा के लिए लगी लंबी कतारें
स्नान के बाद श्रद्धालुओं का रुख मुख्य तीर्थ भगवान कामतानाथ स्वामी की ओर रहा। पांच किलोमीटर लंबे परिक्रमा पथ पर भक्तों का ऐसा तांता लगा कि तिल रखने की भी जगह नहीं बची। धूप और उमस को दरकिनार कर बच्चे, वृद्ध और महिलाएं 'कामदगिरि भगवान की जय' के नारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे। परिक्रमा पथ पर जगह-जगह भंडारों और जल सेवा केंद्रों के माध्यम से भक्तों को राहत पहुँचाई गई।
प्रशासनिक सतर्कता: चप्पे-चप्पे पर पहरा
इतनी भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह मुस्तैद रहा। सुरक्षा व्यवस्था का मोर्चा खुद अपर पुलिस अधीक्षक पीयूषकांत राय ने संभाला। उन्होंने स्वयं रामघाट, निर्मोही अखाड़ा और मेला क्षेत्र का सघन भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। भीड़ नियंत्रण के लिए बेड़ी पुलिया, शंख चौराहा और अन्य प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई थी, जिससे वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित किया जा सका और पदयात्रियों को चलने में असुविधा नहीं हुई। सुरक्षा के मद्देनजर भारी पुलिस बल के साथ-साथ पीएसी के जवानों को भी तैनात किया गया था।
जल और थल दोनों जगह पुलिस मुस्तैद
अपर पुलिस अधीक्षक ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को सख्त निर्देश दिए कि वे श्रद्धालुओं के साथ विनम्रतापूर्वक व्यवहार करें। विशेष रूप से घाटों पर तैनात जल पुलिस और अनुभवी नाविकों को सतर्क रहने को कहा गया ताकि कोई भी श्रद्धालु गहरे पानी में न जा सके। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए कुशल राहत दल और नावों के माध्यम से निरंतर पेट्रोलिंग की जाती रही।
सामाजिक संगठनों ने बढ़ाया मदद का हाथ
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विभिन्न सेवा समितियों ने सराहनीय कार्य किया। चिलचिलाती धूप को देखते हुए जगह-जगह शीतल पेयजल, शरबत और पौष्टिक आहार के स्टाल लगाए गए। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जगह-जगह चिकित्सा सहायता केंद्र स्थापित किए गए थे, जहाँ एम्बुलेंस और डॉक्टरों की टीम मुस्तैद रही।