चित्रकूट। श्रीराम कथा में शनिवार को संत मोरारी बापू ने कहा कि राम नाम का मंत्र बहुत छोटा है, परंतु इसकी महिमा अत्यंत विशाल है। यह जीवन को भवसागर से पार करने का महामंत्र है। जीवन का अंतिम लक्ष्य उस गुणातीत की प्राप्ति होनी चाहिए। सच्चा साधक वही है जो अपनी भूल को स्वीकार करने की क्षमता रखता है और अनुभवी हो।
दीनदयाल शोध संस्थान के आरोग्य धाम परिसर में कथा के आठवें दिन मोरारी बापू ने कहा कि पुराणों के अनुसार जो समुद्र मंथन अमृत के लिये हुआ देवताओं के लिये किया और मानस में साधु रूपी देवताओं के लिये भरत रूपी समुद्र का मंथन प्रेम की स्थापना के लिये हुआ। दुनिया में प्रेम ही एक ऐसी चीज है।
जिसे देने वाले में इतनी ज्यादा मात्रा बढ़ जाती है कि उसे लुटाना ही पड़ता है। जीवन का नाम स्पर्धा नही है, बल्कि जीवन का मूलमंत्र श्रद्धा है। समाजसेवी किशन जालान, सूर्यकांत जालान, करुणेश खेमका, सतुआ बाबा, अखिलेश खेमका मौजूद रहे।