चित्रकूट। रेलवे की पार्सल सेवा बंद करने के निर्णय का व्यापारियों और अन्य लोगों ने विरोध किया है। व्यापारियों का कहना है कि रेलवे के इस निर्णय से व्यापार में मुश्किल आएगी। यह भी कहा कि इस क्षेत्र में पार्सल सेवा रेलवे के लिए कभी घाटे का सौदा नहीं रही।
रेलवे के पार्सल कार्यालय के अनुसार चित्रकूट व मानिकपुर जंक्शन में औसत प्रतिमाह 1400 से अधिक पैकेटों की बुकिंग होती है।बाहर से आने वाले पैकेटों की औसतन संख्या 3500 से ऊपर है। पार्सल से माल भेजने व मंगाने वाले व्यापारियों के अनुसार पार्सल सेवा पर रेलवे का खर्च डेढ़ लाख रुपये व आमदनी साढ़े तीन लाख रुपये से अधिक है।
पार्सल सेवा से मानिकपुर स्टेशन की औसतन आय एक लाख रुपये प्रतिमाह से ऊपर है। व्यापारी घनश्याम दास गुप्ता, छेदी लाल यादव, अजय गुप्ता व देवेंद्र केसरवानी का कहना है कि पार्सल सुविधा से काफी आराम था। अन्य के मुकाबले यह सस्ती भी है। इससे छोटे व्यापारी सुदूर स्थानों से माल मंगा लेते थे।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब पार्सल सेवा बंद ही करनी थी तो मानिकपुर में नया पार्सल कार्यालय बनवा कर रेलवे के लाखों रुपये क्यों बर्बाद किए गए। कहा कि मानिकपुर जंक्शन में पार्सल बुकिंग के लिए रेलवे प्रशासन द्वारा अतिरिक्त पार्सल कर्मचारी की तैनाती भी नहीं की गई है, जिससे रेलवे को वेतन मद में अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा हो।
बुंदेली सेना के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह, व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने कहा कि आदर्श स्टेशन की सूची में शामिल चित्रकूट व मानिकपुर जंक्शन में करोड़ों रुपये का भारी भरकम बजट खर्च कर यात्री सुविधा बढ़ाए जाने को लेकर अनेकों विकास कार्य कराए जा रहे हैं।
पार्सल सेवा को बार-बार बंद कर दिया जाना यात्री हित में नही है। यह सेवा बंद होने से असुविधा बढ़ेगी। इस संबध में मानिकपुर के मुख्य बुकिंग पार्सल पर्यवेक्षक प्रशांत कुमार ने बताया कि उच्चाधिकारियों के निर्देश के बाद बुकिंग बंद की गई है।