हाईकोर्ट के फैसले के बाद 12 बीघा में फैले इस तालाब के सूखे क्षेत्र में महाराजा पद्म सिंह स्टेडियम और पर्यटन की दृष्टि से तालाब को संवारने की कवायद प्रशासन ने शुरू कर दी है।
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चित्रकूट। पहाड़ी क्षेत्र के गड़ौली गांव में बने तालाब में कब्जा करने से उसका अस्तित्व ही समाप्त होता जा रहा है। तालाब गड्ढे में तब्दील हो गया। ग्रामीणों ने इसके अस्तिव को बचाने के लिए जिलाधिकारी सहित कई अधिकारियों को पत्र सौंप चुके हैं ताकि अतिक्रमण हटवाया जा सके।
गड़ौली गांव के बीचो बीच बने पुराने तालाब में चारो तरफ से अतिक्रमण कर लिया गया है। बताया जाता है कि तलाब बीघा छह बिस्वा में बना था। जिसमें चाराें तरफ से 10 फु ट कब्जा कर लिया गया है।
जिससे तालाब का पानी सूख गया है। पानी सूख जाने से यह छोटे तालाब में तब्दील हो गया है। पानी न रहने से गांव वालों के साथ ही जानवरों को भी परेशानी हो रही है। इस मामले को लेकर गांव के शिकायत कर्ता सर्वेश शुक्ला, चंद्रिका प्रसाद, पुल्लू रैदास, आदि ने जिलाधिकारी सहित कई अधिकारियों को तालाब के अस्तित्व को बचाने के लिए पत्र सौंप चुकें हैं।
गड़वाही दाई के नाम से जाना जाता
चित्रकूट। गड़ौली गांव के प्रधान पति परगा ने बताया कि गांव के लोग बताते है कि यहां पर तालाब था। जिसको आज गड़वाही दाई के नाम से जाना जाता है। सरकारी अभिलेख मे छूटा हुआ नंबर है। जिसकी पैमाइश होना चाहिए। गड़ौली गांव के हलका लेखपाल डीडी पटेल का कहना है कि जिस स्थान को तलाब कुछ लोग बता रहे हैं वह छूटा हुआ नंबर है।
मसरूप कहा जाता है।आदेश मिलने पर ही पैमाइश की जाएगी। जिसकी जमीन में कुछ लोगों ने समान रख लिया है।