कोषागार घोटाला -
संवाद न्यूज एजेंंसी
चित्रकूट। कोषागार विभाग में 43.13 करोड़ के घोटाला मामले में एसआईटी ने साफ किया कि हर हाल में सभी आरोपियों पर कानूनी दायरे में कार्रवाई होगी। जेल के बाहर वाले आरोपियों को जल्द ही नोटिस जारी होगी। जांच में मदद न करने पर कड़ी कार्रवाई होगी। जो नामजद है और जो पुलिस पकड़ से बाहर हैं उनकी संपत्ति की भी जांच कराई जाएगी। सोमवार को छह पेंशनर व बिचौलियों से पूछताछ हुई। उनके बैंक खाते में लेनदेन को लेकर गड़बड़ी मिली है। पूछताछ में पेंशनरों ने स्वीकार भी किया कि कोषागार विभाग के कुछ अधिकारी व कर्मचारी उनके संपर्क में थे। उनके विश्वास दिलाने पर ही वह सब लालच में फंसे।
एसआईटी प्रभारी सीओ सिटी अरविंद वर्मा का कहना है कि जांच धीमी नहीं बल्कि तकनीकी रूप से कई पेच होने से आगे बढ़ने में दिक्कत हो रही है। यह तय है कि किसी आरोपी को छोड़ा नहीं जाएगा। इसी क्रम में सोमवार को सभी आरोपी पेंशनर व प्रकाश में आए बिचौलियों को नोटिस भेजी जा रही है। इसमें स्पष्ट किया जा रहा है कि जांच में सहयोग कर जानकारी दें अन्यथा रिकवरी व जांच के लिए दी गई छूट खत्म कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। एसआईटी ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच में कोई लापरवाही नहीं है। इन 14 दिनों में जांच टीम के सामने एक भी बार न आने वालों की तलाश की जा रही है। इसके लिए दो पुलिस टीमें गठित हैं। इनकी सर्विलांस से भी लोकेशन लेकर पकड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
कोषागार विभाग के घोटाले की जांच जारी है। प्रशासन को एक जांच रिपोर्ट तो शासन को भी भेजी जा चुकी है। इसी आधार पर कुछ कार्रवाई हुई है। अब आगे भी कुछ कार्रवाई होने की संभावना है। जांच में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होगी और दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा।
- पुलकित गर्ग, जिलाधिकारी
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रिटायर्ड एटीओ की गिरफ्तारी पर रोक, छह की जमानत याचिका निरस्त
चित्रकूट। कोषागार घोटाला मामले में सोमवार को कहीं राहत तो कहीं आफत की स्थिति रही। जिला अदालत में छह नामजद आरोपियों व एक बिचौलिये की जमानत अदालत ने खारिज कर दी। उधर रिटायर्ड एटीओ को गिरफ्तारी से रोक पर कोर्ट से राहत मिल गई है। जेल में बंद सभी आरोपियों की अदालत में पेशी हुई। अदालत ने सभी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल में रहने के आदेश दिए हैं।
43 करोड़ रुपये के चर्चित कोषागार घोटाले में फंसे पेंशनर्स के मुकदमों पर आज इलाहाबाद उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। इनमें प्रमुख रूप से अवधेश प्रताप सिंह, मोहनिया, सरला देवी, अमित कुमार मिश्रा, अजय कुमार और कृष्ण किशोर त्रिपाठी के नाम शामिल रहे। इनकी पैरवी युवा अधिवक्ता क्रांति किरण पांडेय ने जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस अचल सचदेव की डिवीजन बेंच के समक्ष की।
अधिवक्ताओं ने बताया कि अदालत के समक्ष तर्क दिया कि एफआईआर घटना के 7-8 वर्ष बाद दर्ज की गई, जबकि ट्रेजरी विभाग की बाहरी टीम हर साल ऑडिट और जांच करती है। याची के खाते में गलती से धनराशि भेजी गई थी, जिसका उसने विरोध भी किया और वह रकम स्वेच्छा से वापस जमा कर दी। बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि याची के खिलाफ इसके अलावा किसी अन्य थाने में कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
अदालत ने दलीलों को गंभीरता से लेते हुए सरकारी वकील से जांच आख्या तलब की और अगली सुनवाई तक याची की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। इस आदेश को मामले में फंसे निर्दोष पेंशनर्स के लिए राहत मिली है।
जिले के अधिवक्ता आशीष तिवारी ने बताया कि सोमवार को जेल में बंद छह आरोपियों व एक बिचौलिये की जमानत पर भी सुनवाई हुई। सभी की जमानत याचिका खारिज कर दी गई है। बताया कि कुल 99 नामजद आरोपियों में जेल में बंद 32 आरोपियों की सोमवार को अदालत में आनलाइन पेशी हुई। अदालत ने सभी को 14 दिन की रिमांड पर जेल में रहने का आदेश दिया है।