चित्रकूट। कर्वी-पहाड़ी मार्ग पर रेलवे क्रॉसिंग पर बने ओवरब्रिज पर तेज गति से दौड़ने वाले डंपरों ने स्थानीय भवन स्वामियों के लिए आफत खड़ी कर दी है। इन वाहनों की अनियंत्रित रफ्तार से न केवल धूल का गुबार उड़ता है, बल्कि ओवरब्रिज के आसपास की इमारतों में कंपन से हर पल अनहोनी का डर बना रहता है।
कर्वी-पहाड़ी मार्ग शहर के बीचोबीच से गुजरा है। यह मार्ग कानपुर, कौशांबी, बांदा, फतेहपुर, प्रतापगढ़ समेत कई जनपदों को जोड़ता है। इसलिए यह मार्ग अतिव्यस्ततम है। इस मार्ग पर बढ़ते वाहनों के दबाव से यातायात को व्यवस्थित करने के लिए भारी वाहनों के दिन में निकलने पर पाबंदी है। ऐसे में इस मार्ग पर शहर से करीब चार किमी पहले लोढ़वारा गांव के पास नो-इंट्री पर भारी वाहनों की कतारें लग जाती है।
इसी प्रकार खोह और कलक्ट्रेट के पास भी भारी वाहन सुबह छह बजे के बाद खड़े हो जाते हैं और रात साढ़े नौ बजे नो-इंट्री खुलते ही कतारों में डंपरों के फर्राटे भरते नजर आते हैं। रात के वक्त में इस ओवर ब्रिज के जरिये करीब एक से डेढ़ हजार डंपर व ट्रक शहर के भीतर से निकलते हैं। भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से ओवरब्रिज के आसपास तेज शोर बना रहता है। इससे आसपास के घरों में रहने वाले लोगों को रातभर चैन की नींद नहीं मिल पा रही है। यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
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नई बाजार के रमेश सोनी ने बताया कि रात में नौ बजे से बाद किसी काम से ओवरब्रिज से निकलना हो तो निकलना मुश्किल हो जाता है। डंपर चालक बेखौफ होकर वाहन को दौड़ाते है। ब्रिज के सिंगल होने से पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है। कई बार लोग हादसे का शिकार हो जाते है।
नई बाजार निवासी पीडी गुप्ता ने बताया कि रात में भारी वाहनों के निकलने से नींद हराम हो रही है, साथ ही बच्चों के पढ़ने में भी परेशानी होती है। घर ब्रिज के नजदीक होने के कारण रात में भीषण शोर रहता है और जाम लग गया तो घंटों की फुरसत हो जाती है।
बोले जिम्मेदार
बाईपास निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। स्वीकृति मिलने के बाद बाईपास का निर्माण शुरू होगा। - जितेंद्र सिंह, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग
फोटो 06 सीकेटीपी-03 -रात में ओवरब्रिज से निकलते भारी वाहन। संवाद
फोटो 06 सीकेटीपी-03 -रात में ओवरब्रिज से निकलते भारी वाहन। संवाद