बहुचर्चित बगैंहा सामूहिक नरसंहार कांड में 13 साल बाद शुक्रवार को अदालत ने फैसला सुनाया। इसमें नौ लोगों को फांसी एवं दो को सश्रम आजीवन कारावास की सजा मुकर्रर की गई है। साक्ष्य के अभाव में अदालत ने दो आरोपियों को बरी कर दिया। आरोपियों में कुख्यात डाकू ठोकिया एवं चुन्नी पटेल समेत आधा दर्जन की मौत हो चुकी है।
भरतकूप चौकी क्षेत्र के घुरेटनपुर ग्राम पंचायत के बगैंह के ओमनाथ पटेल का पुरवा में डाक ूअंबिका पटेल उर्फ ठोकिया ने अपने पांच दर्जन साथियों के साथ 17 जुलाई 2003 को तड़के धावा बोल दिया। गहरी नींद में सो रहे लोग कुछ समझ पाते, तब तक ताबड़तोड़ फायरिंग होने लगी।
डकैतों ने अंधाधुंध फायरिंग करते हुए कई घरों के दरवाजे बंद कर आग लगा दी थी। इसमें झुलसने से ओमनाथ के परिवार के रामकिशोर, चुुन्नी देवी, मासूम छोट व गीता के साथ ही गांव में किसी से मिलने आए दुंगवा के बड़का कोल और कुटवादा गर्ग की मौत हो गई थी। इसके अलावा आठ लोग बुरी तरह झुलस गए थे।
कई जानवरों ने भी झुलसने से दम तोड़ दिया था। इस मामले में ओमनाथ के भतीजे राजू पटेल ने डाकू ठोकिया, डाकू शंकर केवट, डाकू गुड्डा पटेल व डाकू चुन्नी पटेल समेत 18 नामजद एवं 26 अज्ञात के खिलाफ सामूहिक हत्या का मामला दर्ज कराया था। दौरान विवेचना डाकू ठोकिया समेत आधा दर्जन आरोपियों की मौत हो गई।
बचे 13 आरोपियों में 11 को अदालत ने दोषी मानते हुए 13 साल बाद 19 जनवरी 2016 को जेल भेज दिया था। इसमें राजा पांडेय उर्फ बुद्धविलास व अशोक पटेल को दोषमुक्त कर दिया था। शुक्रवार को अपर सत्र न्यायधीश/स्पेशल डकैती जज पीके श्रीवास्तव ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अदालत ने नौ लोगों को फांसी व दो को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई। फैसला सुनने के लिए कटघरे में सभी आरोपी मौजूद रहे। सजा के बाद पुलिस ने सभी आरोपियों को भारी सुरक्षा के बीच बांदा जेल भेज दिया।
इन आरोपियों को मिली फांसी- राममिलन उपाध्याय, हीरामणि, कल्लू पटेल, बद्री प्रसाद, रामानंद उर्फ दादू , भूरालाल, हीरालाल, सुभाष गर्ग व महेश्वरी पटेल।
इन्हें हुई आजीवन कारावास की सजा- मंदी प्रसाद व कमलेश पटेल
आरोपी हुए बरी- बुद्धविलास पांडेय उर्फ राजा व अशोक पटेल