फोटो- - 13- जिला अस्पताल के जच्चा बच्चा वार्ड के पास जमीन पर लेटाई गई प्रसूता
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चित्रकूट। दर्द से कराहती प्रसूता को जिला अस्पताल में एक बेड नसीब नहीं हुआ। किसी तरह बच्चे को जन्म दिया तो मौजूद स्टाफ की लापरवाही से नवजात की मौत हो गई। दर्द व गम में डूबी प्रसूता जच्चा-बच्चा वार्ड की जमीन पर ही लेटी रही। वहां से अस्पताल का स्टाफ गुजरता रहा पर किसी को उस पर दया नहीं आई।
शहर से सटे नारायणपुर गांव निवासी शिवप्रसाद ने बताया कि उसकी पत्नी राजमति को मंगलवार की शाम को तेज प्रसव दर्द हुआ। जिस पर आशा गीता देवी व परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। परिजनों ने बताया कि स्टाफ ने उसे भर्ती कर लिया लेकिन दर्द से कराहती महिला का इलाज करने नहीं आई। देर रात को दर्द बढ़ने पर जब प्रसूता चिल्लाने लगी तो स्टाफ आया और इलाज शुरू किया। प्रसूता ने बच्चे को जन्म दिया तो स्टाफ ने बताया कि नवजात मृत है। पेट में ज्यादा पानी होने से नवजात की मौत हो गई है।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि इसके बाद उसे बेड नहीं दिया गया और वह दर्द से तड़प रही थी। इसीलिए वह जमीन पर ही लेटी रही। इस मामले में प्रभारी सीएमएस डा. रामरजन ने बताया कि प्रसूता का डाक्टर व स्टाफ ने सही तरीके से इलाज किया है। शिशु पूरी तरह से विकसित नहीं था। कंजानाइटर की वजह से उसकी रीढ़ की हड्डी व सिर का विकास नहीं था। जिससे मृत बच्चा जना था। प्रसूता व उसके परिजनों ने खुद ही छुटटी मांगी थी और अपने रिस्क पर ही घर जाना चाहते थे। उन्हें बेड दिया गया था लेकिन घर जाने के पहले प्रसूता वहीं जमीन पर लेट गई होगी।