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पलायन करने वालों का नहीं मिला हाल

Thu, 05 May 2016 12:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चित्रकूट
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कच्चे घर के बाहर बैठा चंदीलाल। - फोटो : अमर उजाला
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मऊ (चित्रकूट)। पहले खेत में कम बारिश से बुआई नहीं कर पाया और किसी तरह किराए के पानी से दो बीघे में फसल बोई तो महज एक क्विंटल गेहूं मिला। इस पर परिवार के बीस सदस्य मजदूरी की तलाश में पलायन कर गए। गांव में मनरेगा से काम भी नहीं मिला। गांव से जाने वालों का अभी तक कोई हाल नहीं मिला।      मऊ ब्लाक क्षेत्र के लाल तारोड़ स्थित पुरा में चंदीलाल विश्वकर्मा के छह अपने परिवार के साथ रहते थे। इस बार के  सूखे ने इस परिवार को बिखेर भी दिया। दु:खी भाव से चंदी लाल ने बताया कि चार बीधे की खेती में दो बीघे में बुआई नहीं हुई। दो बीघे में महज एक क्विंटल गेहूं हुआ। इस पर परिवार का भरण पोषण मुश्किल हो रहा था। ऐसे में पुत्र मुन्नी लाल, अंगू, राममंगल और कामता प्रसाद अपनी पत्नी और बच्चों को लेकर भोपाल चले गए।
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गांव में दो पुत्र शारदा व भैरों बचे हैं जिनकी दो पुत्रियां शादी लायक हैं। इसलिए वह भी गांव से बाहर नहीं गए। चार भाई कहकर गए थे कि कमाकर आने के बाद सभी पुत्रियों की धूमधाम से शादी करेंगे। उनको एक महीने से ज्यादा समय गए हो गए लेकिन अभी तक उनका हालचाल नहीं मिला।  चंदीलाल ने बताया कि सरकारी सहायता के रूप में केवल उन्हें एक बार तीन हजार दो सौ का चेक मिला है जबकि उसके नाम अंत्योदय राशन कार्ड भी है। राशन सामग्री नहीं मिलती। अन्य पुत्रों के पास एपीएल कार्ड है।इस परिवार की हालत इतनी खराब हो गई कि जब खुद का पेट भरने को अनाज और अन्य सामग्री नहीं मिलने लगी तो घर में मौजूद दो गायों को भी छोड़ दिया। घर में भूसा नहीं है। बताया कि किसी ने भूसा नहीं दिलाया।
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