मुआवजा के लिए कार्यालयों का चक्कर लगा रहा पीड़ित
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चित्रकूट।जिले में लगातार हो रहे अग्निकांड की घटनाओं से कई गांवों की बस्ती उजड़ गई है। कई किसानों की फसलें, घरों की गृहस्थी व अन्य कीमती सामग्री जल गई। पीड़ित परिवारों को दो वक्त के भोजन के लिए दूसरों पर मोहताज रहना पड़ता है। अग्निपीड़ितों को आर्थिक सहायता न मिलने पर परिवार सहित बुधवार को कलेक्ट्रेट परिसर में जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर दुखड़ा रोया।
जिले में मार्च माह के अंतिम सप्ताह से शुरू हुए अग्निकांड की घटनाएं लगातार जिले में जारी हैं। जिसमें राजापुर क्षेत्र के कुसैली गांव में हुई घटना में 60 घर जले जबकि गड़ौली गंाव में सैकड़ों घर जल गए। इसके पूर्व पहाड़ी क्षेत्र के पथरा गांव में भी एक दर्जन घर जले थे। इसके साथ ही अन्य गांवों में खेत व खलिहानों में अग्निकांड की घटनाओं में लाखों की फसल राख हो चुकी है। फायर बिग्रेड के अनुसार मार्च माह से लेकर अबतक जिले में छोटी-बड़ी दो दर्जन आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं।
नहीं मिली सहायता-
चित्रकूट। राजापुर के कल्लू ने बुधवार को डीएम को ज्ञापन देकर बताया कि अज्ञात कारण के चलते उसके डेरे में छह अप्रैल को आग लग गई थी। जिससे लगभग तीन लाख की गृहस्थी जल गई थी। आग लगने से उसका परिवार बेघर हो गया है। उसे कोई आर्थिक सहायता नहीं मिली है।
पक्के आवास की आस लगाए पीड़ित
चित्रकूट। राजापुर पहाड़ी क्षेत्र के तीन गांव में लगी आग के बाद बेघर हुए कई अग्निपीड़ित परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास मांग रहे हैं। पहाड़ी विकास खंड अधिकारी शेर बहादुर ने बताया कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि अग्निपीड़ितों को आवास उपलब्ध कराए जाए। गृह अनुदान से इन पीड़ितों की मदद की जाती है।
थानों में हो दमकल गाड़ियां
चित्रकूट। ज्यादातर आग लगने वाले स्थानों पर फायर ब्रिगेड देर से पहुंचने से आग पर नियंत्रण नहीं हो पाता। जबतक ये वाहन पहुंचते हैं तबतक काफी नुकसान हो चुका होता है। ऐसे में फायर बिग्रेड के वाहन यदि थानों में रहेंगे तो सूचना मिलने पर जल्दी मौके पर पहुंच सकते हैं। अभी तो मुख्यालय से सूचना वाले स्थान पर जाने के कारण समय लगता है। ग्रामीण राम किशोर सिंह, रामचरण वर्मा, सुरेश लाल का कहना है कि जिले के हर थाने में फायर ब्रिगेड की गाड़ियां होनी चाहिए। दमकल की गाड़ियां गांव के नजदीक होगी तो अधिक नुकसान नहीं होगा।