मकर सक्रांति पर्व पर त्रिवेणीघाट में गंगाघाट पर आस्था की डुबकी लगाने उमड़ी श्रद्घालुओं की भीड़।
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गोस्वामी तुलसीदास राजकीय महाविद्यालय में पर्यटन की संभावनाएं एवं समस्या विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन हुआ। जिसमें मंदाकिनी नदी में बढ़ते प्रदूषण को रोकने एवं चित्रकूट स्थल के आसपास स्थित तीर्थ स्थानों को विकसित करने पर चर्चा की गयी।
दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में डॉ. हलीम खान ने कहा कि मंदाकिनी नदी में बढ़ रहे प्रदूषण से पर्यटन पर असर पड़ रहा है। नदी के किनारे दाह संस्कार न किया जाए। फूल व अन्य सामग्री नदी में प्रभावित न की जाए। छात्र-छात्राएं जागरूकता के माध्यम से गंदगी को दूर कर सकते हैं।
डा. अंबरीश राय ने कहा कि पर्यावरणीय विकास के नाम पर नैसर्गिकता को समाप्त न करें। डा. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने कहा कि भगवान श्रीराम चित्रकूट में ग्यारह वर्ष छह माह तक रहे। चित्रकूट के विभिन्न 22 स्थानों का वर्णन करते हुए इन स्थानों को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया।
डा. नीलम चौरे ने कहा कि पर्यटन की समस्या के लिए शासन, प्रशासन के साथ ही क्षेत्र के संस्कारों को भी दोषी ठहराया जा सकता है। गोस्वामी तुलसीदास राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य डा. तिलकधारी सिंह ने कहा कि धर्म और आध्यात्मिकता की
इस प्राचीन पावन नगरी को एक पर्यटन संकुल के रूप में विकसित करने के लिये राजापुर, मानिकपुर, भरतकूप से लेकर मध्य प्रदेश के विभिन्न पर्यटन स्थलों को शामिल किया जाए। इस मौके पर डा. मनोज अस्थाना, डा. विजय यादव, डा. अजय चौरे, डा. जयशंकर मिश्र, अमित कुमार सिंह, डा. संगीता, डा. केपी सिंह आदि ने संबोधित किया।