चित्रकूट। विश्व आर्द्र भूमि दिवस के अवसर पर रैपुरा के गुंता बांध पर बर्ड वाचिंग कार्यक्रम मनाया गया। जिसमें भूमि के महत्व व संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया।
उप निदेशक रानीपुर टाइगर रिजर्व/प्रभागीय वनाधिकारी प्रत्युष कुमार कटियार ने कहा कि आर्द्र भूमि को आमतौर पर दलदल और नमी वाले क्षेत्रों के रूप में परिभाषित किया जाता है। जलमग्न भूमि, झील, तालाब आदि आर्द्र भूमियों के ही रूप है। पर्यावरण एवं मानव जीवन में आर्द्र भूमियों की बेहद अहम भूमिका होती है। आर्द्र भूमियों में पौधों एवं जन्तुओं की समृद्व जैव विविधता पायी जाती है, जिससे पक्षी,सरीसृप आदि जीवों को आहार एवं आवास मिलता है। क्षेत्रीय वनाधिकारी अपूर्व श्रीवास्तव ने कहा कि आर्द्र भूमि वातावरण से अत्यधिक कार्बन को संचित करती है तथा भूजल स्तर में वृद्वि करती है। वर्षा के पानी को संग्रहण करती है।
जिला परियोजना अधिकारी( नमामि गंगे ) गोपाल कृष्ण गुप्ता ने कहा कि शहरीकरण, प्रदूषण और औद्योगिकीकरण से आर्द्र भूमियों का क्षेत्रफल घट रहा है। इसलिए इनके सरंक्षण पर जोर देने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राएं, मानिकपुर प्रथम, द्वितीय, मारकुण्डी प्रथम, द्वितीय, बंरगढ व कर्वी रेंज के कर्मचारी मौजूद रहे।