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Chitrakoot News: मानव जीवन को नई दृष्टि प्रदान करती भगवान बुद्ध की वाणी

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चित्रकूट। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान लखनऊ व जगदगुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय, के संयुक्त तत्वावधान में चल रही ग्रीष्मकालीन कार्यशाला में विद्वानों ने बुद्ध के विचारों को वर्तमान जीवन दर्शन के संदर्भ में बताया। इसमें देश एवं विदेश से ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से प्रतिभागियों ने अपने-अपने शोध पत्र प्रस्तुत किये।
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गुरुवारको विवि के सभागार में कोरिया के डॉ. कमलेश जंगगिड ने कहा कि भगवान बुद्ध की वाणी मानव जीवन को नई दृष्टि प्रदान करती है। जिसके माध्यम से समसामयिक समस्याओं को हल करके प्रगति का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध के विचार भारतीय संदर्भ में ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मैत्री संबंधों को मजबूत बनाने में भी अपना योगदान देते हैं। समाजशास्त्र विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर सुनीता श्रीवास्तव ने कहा कि बौद्ध धर्म एवं योग की शिक्षा को यदि आधुनिक जीवन में प्रयुक्त किया जाए तो निश्चित रूप से मानसिक एवं भौतिक दोनों प्रकार के संतुलन को बनाया जा सकता है।
हिंदी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर शांत कुमार चतुर्वेदी ने आप्त दीपो भाव की अवधारणा को समझाते हुए वर्तमान वैश्विक संदर्भ में इसकी उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला।दीपक कुमार मिश्र ने बौद्ध दर्शन की आधुनिक संदर्भ में प्रासंगिकता और बौद्ध दर्शन के माध्यम से मानव व्यक्तित्व के उत्कृष्ट विकास पर प्रकाश डाला।
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सत्र की अध्यक्षता करते हुए इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के डॉ. महेंद्र कुमार उपाध्याय ने बौद्ध दर्शन के सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक संतुलन को बताया। संचालन संगीत विभाग के अध्यक्ष डॉ. गोपाल कुमार मिश्रा ने किया
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