चित्रकूट। मुंबई हावड़ा रेलमार्ग के मझगवंा-टिकरिया के बीच पटरी पार करते समय मंगलवार की देर रात ट्रेन की चपेट में आने से तेंदुए की मौत हो गई। तेंदुए के टकराने की जानकारी ट्रेन चालक ने मझगवा स्टेशन मास्टर को दी। इधर, पेट्रोलिंगमैनों ने तेंदुए देख वन विभाग के अधिकारियों को सूचना दी। काफीजद्दोजहद के बाद बिना पोस्टमार्टम के उसके शव को मुख्य वन्य संरक्षक की देखरेख में आईबीआरआई रायबरेली भेजा गया है।
घटना की सूचना मिलते ही देर रात ही वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के वार्डन जीडी मिश्रा, डीएफओ कैलाश प्र्रकाश,रानीपुर वन्य जीव विहार के वनाधिकारी त्रिवेणी प्रसाद, वनक्षेत्राधिकारी रमेश यादव व मझगवंा वन रेंज के रेंजर दीपक राज अपने कर्मचारियों के साथ मौके पर पहुंचे। बुधवार की सुुबह मुख्य वन संरक्षक सुनील चौधरी भी घटनास्थल पहुंचे। इस दौरान यह पता चला कि घटना रानीपुर वन्य जीव विहार क्षेत्र मानिकपुर उप्र में है। तब मप्र के अधिकारियों से बातचीत कर तेंदूुए का शव मारकुंडी उप्र लाया गया। मुख्य वन संरक्षक ने बताया कि इसका पोस्टमार्टम आईबीआरआई रायबरेली में कराया जाएगा। इसके लिए शाम छह बजे यहां से तेंदुए के शव को विशेष वाहन से भेज दिया गया है। उन्होंने इस घटना पर चिंता जताई और कहा कि अक्सर इस रूट पर इस तरह की घटनाएं हो रही हैं। इसके उपाय तलाशने होंगे।
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नहीं था कॉशन, न बजाया हार्न
मानिकपुर(चित्रकूट)। जबलपुर रेल विभाग के कॉशन लगाकर हार्न बजाते हुए निकालने के आदेश पर अभी इसका पालन नहीं हो रहा है। मंगलवार की रात को तेंदुए की मौत इसका प्रमाण है। मुख्य वन संरक्षक सुनील चौधरी ने बताया कि तेंदुए के सिर पर टक्कर लगी है। ट्रेन की गति तेज होने से यह हादसा हुआ। वन क्षेत्र की रेल पटरी किनारे चेन व जाली लगवाने के प्रस्ताव पर भी अभी तक कोई अमल नहीं हुआ है। गौरतलब है कि अभी तक इस क्षेत्र में चार से अधिक तेंदुए मार गए है। इस मामले में वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पूरी संभावना है कि ट्रेन तेज गति में बिना हार्न बजाए ही गुजर रही होगी तभी इसी बीच तेंदुए के आने पर यह घटना हुई।
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मादा तेंदुए की उम्र छह साल
मानिकपुर। ट्रेन की चपेट में आने से मृत तेंदुआ मादा था। इसकी उम्र लगभग छह साल की थी। यह जानकारी डीएफओ कैलाश प्रकाश ने दी है। संवाद
रेल लाइन बनी वन्यप्राणियों के लिए काल
चित्रकूट। ट्रेन से टकराकर तेंदुआ के मौत की घटना फि र सामने आई है। वन्यजीवों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक के बाद एक विलुप्त प्राय वन्यप्राणी मौत का शिकार होते जा रहे है। लेकिन विभाग के पास एसी कोई व्यवस्था नहीं है इससे वन्यजीवों को ट्रेन से कटने से बचाया जा सके। कुल मिलाकर जिस तरह से वन्यजीवों के मौत का क्रम जारी है तराई जंगल के बीच से गुजरी रेलवे लाइन वन्यप्राणियों के लिए काल साबित हो रही है। इस क्षेत्र में ट्रेन से कटकर अक्सर जंगली जानवरों की मौत होती रहती है। लेकिन सरकार के पास ऐसा कोई प्लान नहीं है की वन्यजीवों के मौत को ट्रेन से रोका जा सके। वर्षों पूर्व चितहरा रेलवे स्टेशन के पास बाघ की ट्रेन से कटने से मौत हो गई थी। इसी तरह इंटवा-टिकरिया के बीच भालू ट्रेन से कट गया था। पिछले महीनें टिकरिया-मारकुंडी स्टेशन के बीच तेंदुआ की ट्रेन से कटकर मौत हो गई थी। ऐसे ही प्रत्येक वर्ष दर्जनों वन्यप्राणी काल के गाल मे समा जाते हैं। वन विभाग इनकी सुरक्षा में नाकाम साबित हो रहा है।