चित्रकूट। जिंदा को मृतक दिखाकर करोड़ों की जमीन का फर्जी वरासत करने के मामले में लेखपाल को डीएम ने निलंबित कर दिया। जांच के लिए एडीएम की अध्यक्षता में कमेटी भी गठित की है। मंडलायुक्त ने डीएम से मामले की जानकारी ली है।
तहसील कर्वी के सीतापुर निवासी कल्लू उर्फ कन्नू कुशवाहा ने डीएम को दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया कि खतौनी की नकल निकलवाने पर पता चला कि बेशकीमती जमीन को गांव निवासी कुट्टू रैकवार ने 1959 में मेरे मृत्यु का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर करीब एक बीघा जमीन अपने नाम वरासत करा लिया है। उसने आरोप लगाया कि हल्का लेखपाल ने बिना मौके पर गए ही झूठी रिपोर्ट लगा दिया था। इस पर वरासत की गई है।
अधिवक्ता राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि कुट्टू रैकवार ने न्यायालय में जो कागजात जमा किया है।
उसमें पिता की मृत्यु 1959 में दिखाई है, जबकि कुट्टू के आधार कार्ड में जन्मतिथि 1966 दर्ज है। अब सवाल यह है कि पिता की मौत के सात साल बाद बेटा कैसे हो गया। इसका मतलब तहसील के अधिकारियों ने फर्जी तरीके से वरासत की है। मामले को अमर उजाला ने शुक्रवार 31 जनवरी के अंक में जिंदा को मृतक दिखाकर करोड़ों की जमीन कराई वरासत नामक शीर्षक के साथ प्रकाशित किया था। (संवाद)